मेरठ के बहसूमा में हुए चर्चित अमित कश्यप हत्याकांड में 12 नंबर का संयोग सामने आया है। मेरठ के सांप कांड से जुड़े इस मामले में हत्या की तारीख से लेकर अदालत में पेश किए गए गवाहों की संख्या और सजा सुनाने वाली अदालत तक 12 का आंकड़ा जुड़ा है।
मेरठ अमित हत्याकांड: 12 अप्रैल को हत्या, 12 गवाहों के बाद एडीजे-12 की अदालत ने 12 मिनट में सुनाया फैसला
अमित कश्यप की हत्या 12 अप्रैल 2025 की रात की गई थी। मामले में अभियोजन और वादी पक्ष की ओर से अदालत में 12 गवाह पेश किए गए। सजा सुनाने वाली अदालत एडीजे-12 थी और सजा सुनाने में 12 मिनट लगे।
12 अप्रैल 2025 की रात हुई थी हत्या
अमित कश्यप की हत्या 12 अप्रैल 2025 की रात की गई थी। इस मामले में सुनवाई के दौरान अभियोजन और वादी पक्ष की ओर से अदालत में कुल 12 गवाह पेश किए गए। हत्याकांड में सजा सुनाने वाली अदालत का नाम भी एडीजे-12 है। इस तरह मामले में तारीख, गवाहों की संख्या और अदालत के साथ 12 का आंकड़ा जुड़ा रहा।
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अलग-अलग भूमिकाओं से जुड़े 12 गवाह पेश किए गए। इनमें मृतक के भाई और मुकदमे के वादी मोनू कश्यप से लेकर जांच अधिकारी, चिकित्सक और टेलीकॉम कंपनियों के नोडल अधिकारी शामिल रहे।
मोनू कश्यप-वादी मुकदमा और मृतक का भाई।
मुनेश -तथ्य साक्षी।
कृष्ण- सपेरे का धेवता।
प्रीतनाथ- सपेरा कृष्ण का नाना।
उपनिरीक्षक पंकज गौतम- पंचायतनामा भरने वाले दरोगा।
रामप्रवेश- कांस्टेबल क्लर्क, चिक लेखक और एफआईआर दर्ज करने वाले।
डॉ. कपिल गर्ग- पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक।
उपनिरीक्षक इन्दु वर्मा- विवेचक और जांच अधिकारी।
शुभम शर्मा- वोडाफोन के नोडल अधिकारी।
लोकेश कुमार- रिलायंस जियो के नोडल अधिकारी।
सुखपाल- अमित की मृत्यु के बाद सांप पकड़ने वाले।
पिंटू- अमित की मृत्यु के बाद सांप पकड़ने वाले।
एडीजे-12 ने 12 मिनट में सुनाई सजा