जंग-ए-क्रांति का आगाज करने वाली मेरठ की माटी ने संगीत के कई दिग्गजों को जन्म दिया तो शब्दों के चितेरे भी इस भूमि से निकले। हिंदी फिल्मों को गीतकवि स्व. भारतभूषण से लेकर साहित्यकार स्व. वेदप्रकाश शर्मा और उपन्यासकार सुरेश जैन रितुराज जैसे नामचीन हीरे मेरठ की खान से निकले। इनकी सोच, कल्पनाएं जब शब्दों में ढली तो अद्भुत, अविस्मरणीय साहित्य बनकर दुनिया में छा गईं। निज उन्नति में हिंदी की मिठास बेशक हमें बोझिल महसूस होती हो, मगर मेरठ के साहित्य शिल्पियों की कृतियों ने बॉलीवुड से विदेश तक नाम कमाया। आज इस शहर के युवा अपनी हिंदी लेखन विधा से दुनिया में नाम कमा रहे हैं। हिंदी के जिस गुरुत्व को मेरठ के गीतकवि स्वर्गीय भारतभूषण और वेदप्रकाश शर्मा ने महसूस किया वो सम्मान आज भी मेरठ को युवा साहित्यकारों के माध्यम से मिल रहा है। यही नहीं अंग्रेजी के साथ डिजिटल क्रांति के दौर में मेरठ के शब्द चितेरों की रचनाएं विश्व पटल पर चमक रही हैं।
बॉलीवुड से लेकर विदेश तक छाए हैं मेरठ के सितारे, इन 9 शख्सियतों के बारे में जानें खास बातें
सुरेश जैन रितुराज
दुनिया को लुगदी साहित्य का तोहफा देने वाले प्रसिद्ध लेखक सुरेश जैन रितुराज मेरठ की माटी के ही लाल हैं। तुलसी पॉकेट बुक्स के माध्यम से सुरेश जैन रितुराज के शब्द मेरठ की हवा से निकले तो पूरी दुनिया ने उन्हें उपन्यास और पॉकेट बुक्स में पढ़ा। आज भले डिजिटल स्टडी के दौर ने लुगदी साहित्य को पछाड़ दिया हो, लेकिन उस पीढ़ी के पाठकों को आज भी प्रेम और सस्पेंस से भरी वो कहानियां स्मरण हैं।
स्व. वेदप्रकाश शर्मा
साहित्य जगत को वर्दीवाला गुंडा जैसा मशहूर उपन्यास देने वाले स्वर्गीय वेदप्रकाश शर्मा ने बालीवुड में अपनी लेखनी से धाक जमाई। अक्षय कुमार की खिलाड़ी सीरिज की अधिकांश फिल्में वेदप्रकाश शर्मा द्वारा लिखी कहानियों पर ही बनी हैं।
कवि डॉ. हरिओम पवार
अंतराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कवि डॉ. हरिओम पवार ओज व वीर रस के प्रख्यात कवि हैं। लालकिले पर हर वर्ष होने वाले कवि सम्मेलन में क ई बार डॉ. हरिओम पवार की कविताएं गूंजी। कारगिल युद्ध से लेकर कश्मीर के माहौल, देश के शहीद जवानों की शहादत व शहीदों के परिवारों के दर्द, उनके घर में पसरे मातम को डॉ. पवार ने अपनी पंक्तियों में हमेशा प्रमुखता दी है। वीर रस से भरी इनकी कविताएं युवा ही नहीं हर उम्र के श्रोताओं की पहली पसंद है। शब्दों के धनी होने के साथ ही डॉ. पवार वाणी फाउंडेशन के नाम से संस्था संचालित करते हैं जिसके माध्यम से मूकबधिर बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जाती है।
स्व. गीतकवि भारतभूषण
हिंदी के कवि व सुकुमार गीतकार स्वर्गीय भारत भूषण ने फिल्मों के साथ राम की जलसमाधि जैसी अद्वितीय रचना भी समाज को दी।