अपराधी बदन सिंह बद्दो अपने पिता के साथ ट्रक चलाया करता था। उसके बाद शराब तस्करी में उतरा और फिर भू-माफिया बन गया। उसने केबल कारोबार में भी वर्चस्व हासिल करने की कोशिश की। डॉन की तरह जिंदगी जीने वाला बद्दो बड़े विवादों में कभी मध्यस्थ तो कभी निर्णायक की भूमिका निभाता था।
कभी पिता के साथ ट्रक चलाता था बद्दो, फिर बन गया भू-माफिया, अब उठ रहा ये बड़ा सवाल
पुलिस बताती है कि उसकी कई महिला मित्र भी हैं। देशी विदेशी टॉप ब्रांड (कपड़े, चश्मे, जूते, शराब, गाड़ियों) का शौकीन बद्दो शाही जिंदगी जीता था। पर्शियन बिल्लियों को हाथ में रखना वह अपना गुडलक मानता है। वह खासकर विदेशी महिला माफिया और बड़े जासूसों के बारे में भी जानने का शौक रखता है। शनिवार को उसकी कोठी की कुर्की के दौरान पुलिस को इस बात के सबूत मिले, जिसके आधार पर पुलिस ने यह बातें बताईं।
फूलप्रूफ प्लानिंग के बाद हुआ था फरार
बद्दो फूलप्रूफ प्लानिंग कर फरार हुआ था। यह बात मेरठ पुलिस को 19 महीने बाद पता चली है। दरअसल, बद्दो की कोठी से कोई भी ऐसा सामान पुलिस को नहीं मिला, जो बहुत महत्वपूर्ण हो। कोठी से पुलिस को वही सामान मिला है, जिसे वह साथ नहीं ले जा सकता था। कुर्क किया गया सामान ब्रांडेड तो है। लेकिन सभी घरों में रूटीन में इस्तेमाल होने वाला ही है।
रविवार दिन भर ब्रह्मपुरी पुलिस ने कोठी से मिले कीमती सामान की जांच-पड़ताल की। लेकिन ऐसा कुछ नहीं मिला, जिससे पुलिस को उसके खिलाफ चल रहे किसी मुकदमे में खास मदद मिल सके। कोठी में बद्दो से संबंधित बैंक की पासबुक, मकान की रजिस्ट्री के कागजात, पासपोर्ट और कोई रजिस्टर नहीं मिला, जिसमें बद्दो व उसके बेटे सिकंदर से जुड़ी कोई जानकारी हो। ऐसा भी कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे पता चले कि बद्दो का किस-किस से कनेक्शन था।
बद्दो की गाड़ी कहां गई?
बद्दो हमेशा महंगी गाड़ी से चलता था। उसके रहने का अंदाज भी अलग था। कुर्की के दौरान बद्दो की गाड़ी पुलिस को नहीं मिली। सवाल है कि आखिर बद्दो ने अपनी गाड़ी किसी को दे दी या फिर अपने साथ ले गया। दरअसल, मेरठ पुलिस दावा करती रही है कि बद्दो अपनी गाड़ी से नहीं भागा है बल्कि उसके एक साथी ने उसको दिल्ली मेट्रो स्टेशन पर छोड़ा था। ऐसे में पुलिस बद्दो की गाड़ी अब तक क्यों बरामद नहीं कर सकी, जिससे वह चलता था।