20 अक्तूबर की शाम जब एक दरोगा महिला वकील के साथ भाजपा पार्षद के होटल में खाना खाने गए थे। वहां खाने में देरी को लेकर दरोगा और होटल कर्मचारियों में विवाद हो गया। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि भाजपा पार्षद मनीष चौधरी मौके पर पहुंचे और दरोगा के साथ मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान भाजपा पार्षद ने दरोगा को पांच थप्पड़ जड़ दिए, जिसका वीडियो बाद में वायरल हो गया।
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वहीं, वीडियो देखकर पुलिस अधिकारियों में हड़कंप मच गया। पुलिस ने आनन-फानन में भाजपा पार्षद को गिरफ्तार कर लिया और फिर संगीन धाराओं में उसे जेल भेज दिया। जबकि भाजपा पार्षद का आरोप था कि दरोगा और महिला वकील शराब के नशे में थे। उन्होंने होटल में कर्मचारियों के साथ गाली-गलौच की। साथ ही आरोप लगाया कि महिला ने होटल में जमकर तोड़फोड़ भी की।
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इसके बाद एसपी सिटी रणविजय सिंह ने कार्रवाई करते हुए दरोगा को लाइन हाजिर कर दिया, लेकिन भाजपा पार्षद के समर्थकों का कहना था कि दरोगा को निलंबित क्यों नहीं किया गया। इसके विरोध में उन्होंने कंकरखेड़ा थाना में धरना प्रदर्शन भी किया था।
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इस दौरान भाजपा पार्षद के समर्थकों ने पुलिस की गाड़ी पर पथराव किया और पुलिस की गाड़ी से पार्षद को खींचने की भी कोशिश की थी। यही नहीं बल्कि पुलिस अधिकारियों से पार्षद के समर्थकों की तीखी नोकझोंक भी हुई, हालांकि पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को खदेड़ दिया था।
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वहीं, एसपी सिटी रणविजय सिंह ने पार्षद समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करीब 200 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद भाजपा समर्थकों ने 25 अक्तूबर को बंद का एलान किया, लेकिन इसका कोई खासा असर देखने को नहीं मिला। हालांकि भाजपा समर्थकों ने फिर से बंद का एलान किया है।