सहारनपुर के बेहट में नदी पर पुल, तटबंध, और मुख्य रास्ते की मांग के लिए आमरण अनशन पर बैठे 13 ग्रामीणों की सोमवार सुबह तक हालत बिगड़ गई। इसकी सूचना पर स्थानीय पुलिस प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। सीएचसी से चिकित्सकों की टीम से परीक्षण कराया गया और तीन लोगों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल जाने की सलाह दी गई। मगर एसडीएम के सुझाव के बाद भी ग्रामीणों ने विरोध किया।
सहारनपुर: आमरण अनशन पर बैठे 13 ग्रामीणों की हालत बिगड़ी, चार को भेजा अस्पताल
आमरण अनशन के दौरान रविवार दोपहर में अली हसन, सुशील कुमार, राजेंद्र कुमार, राजेश शर्मा, कैलाशचंद, रोहताश राणा, करेशन सिंह, नवाब अली, सुनील कुमार की हालत बिगड़ गई। आमरण अनशन पर ग्रामीणों की हालत बिगड़ने की सूचना मिलते ही एसडीएम युगराज सिंह, सीओ विजयपाल सिंह और कोतवाली प्रभारी निरीक्षक पवन चौधरी मौके पर पहुंचे।
एसडीएम ने सीएचसी बेहट से चिकित्सकों की टीम मौके पर बुलाई। चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोहम्मद उस्मान की अगवाई में पहुंची टीम ने बीमार हुए ग्रामीणों का चिकित्सीय परीक्षण किया। इनमें रोहताश राणा, अली हसन और सुशील कुमार की हालत गंभीर बताई गई। चिकित्सा अधिकारी ने तीनों लोगों को तुरंत जिला अस्पताल रेफर किए जाने की बात एसडीएम से कही।
एसडीएम ने उन्हें अस्पताल भिजवाने का प्रयास किया।लेकिन ग्रामीण भड़क गए। ग्रामीणों ने कहा कि यदि उन्हें उनका इलाज कराना है तो यहीं पर डॉक्टरों की टीम और जरूरी दवाएं मंगाकर इलाज कराएं। वह अपने लोगों को किसी भी हालत में अस्पताल नहीं जाने देंगे।
काफी जद्दोजहद के बाद करीब साढ़े तीन बजे एसडीएम ने दो लोगों को एंबुलेंस से जिला अस्पताल भिजवाया जबकि अली हसन ने अस्पताल जाने से साफ इंकार कर दिया। सोमवार सुबह भी चार ग्रामीणों की हालत बिगड़ गई जिनमें से दो को अस्पताल भेजा गया लेकिन दो ने अस्पताल जाने से साफ इनकार कर दिया।
एसडीएम के आश्वासन पर भी अनशन से नहीं हटे
एसडीएम ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया कि वह अपना आमरण अनशन खत्म कर दें और फिलहाल बाढ़ से बचाव के लिए कुछ पत्थरों की पेंचिंग नदी में लगवा लें। लेकिन ग्रामीणों ने उन्हें दो टूक जवाब दिया कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो जाता वह किसी भी कीमत पर आमरण अनशन खत्म नहीं करेंगे।
शाम के करीब चार बजे पूर्व विधायक महावीर सिंह राणा भी ग्रामीणों के बीच पहुंचे और आमरण अनशन खत्म करने की अपील की। लेकिन ग्रामीणों ने उन्हें भी वहीं जवाब दिया। इसके चलते उन्हें वापस लौटना पड़ा।
भारतीय किसान संगठन ने दिया समर्थन
आमरण अनशन पर बैठे ग्रामीणों के बीच भारतीय किसान संगठन के पदाधिकारी भी पहुंचे और अनशन को समर्थन दिया। संगठन के मुजफ्फरनगर जिलाध्यक्ष अजब सिंह ने कहा कि यदि प्रशासन ने 24 घंटे के भीतर ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया तो भारतीय किसान संगठन ग्रामीणों के साथ मिलकर आंदोलन को तेज करेगा। यह लड़ाई आरपार की लड़ी जाएगी।