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अमर उजाला पड़ताल: कहीं बन रहे सिलिंडर तो कहीं केमिकल का कारोबार, अवैध धंधे खुलेआम, अफसर बने अनजान

Thu, 12 Sep 2019 12:38 PM IST
Dimple Sirohi दीपक भारद्वाज, अमर उजाला, मेरठ
दीपक भारद्वाज, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 12 Sep 2019 12:38 PM IST
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illegal businesses are openly in Meerut,  officer and Administration unknown
गोदाम में रखे सिलेंडर - फोटो : अमर उजाला

मेरठ शहर की कई आवासीय कॉलोनियों में व्यवसायिक गतिविधियां खुलकर चल रही हैं। अवैध फैक्टरियों में कहीं सिलेंडर बनाए जा रहे हैं तो कहीं केमिकल का कारोबार हो रहा है। इन फैक्टरियों में ज्वलनशील पदार्थों का जखीरा मौजूद होने से आसपास रहने वाले लोगों की जान जोखिम में है।

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लापरवाही का आलम देखिए कि जिस विभाग के अफसरों से भी इसको लेकर बात हुई उसने ही हाथ  खड़े कर लिए। कोई भी विभाग इन व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई करने की हामी नहीं भर रहा है।
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दिल्ली रोड स्थित आरके पुरम आवासीय क्षेत्र में पांच किलोग्राम के सिलेंडर और टेंप्रेचर सेंसर हॉजिंग पार्ट का उत्पादन किया जा रहा है। स्थानीय निवासियों की शिकायत पर प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने फरवरी 2019 में इसकी रिपोर्ट एमडीए को दी थी। लेकिन इसके बावजूद एमडीए कार्रवाई करने से बच रहा है।

इन फैक्टरियों में चलने वाले उपकरणों से स्थानीय निवासियों को काफी परेशानी हो रही है। इनके यहां पर सिलेंडर पर पेंटिंग के लिए गन मशीन, कटिंग मशीन, प्रेस मशीन चलाई जाती है। वहीं, टेंम्प्रेचर सेंसर के उत्पादन के लिए लेथ मशीन, ड्रिल मशीन का संचालन किया जाता है।  

ताला बंद कर हो रहा संचालन

आरके पुरम स्थित सिलेंडर फैक्टरी में ताला बंद कर कार्य किया जा रहा है। अमर उजाला की टीम के पहुंचते ही फैक्टरी का ताला बंद कर दिया गया। इसके बाद मशीनों से सिलेंडर पर पेंट करने का कार्य किया जा रहा था। निरीक्षण के समय भी प्रदूषण नियंत्रण विभाग की टीम ने एमडीए को आख्या देकर कार्रवाई के लिए लिखा था।

यहां चल रहीं फैक्टरियां

- प्लाट नंबर 23 चिरंजीव इंटरप्राइजेज में रोजाना पांच किलो के 90 सिलिंडरों का उत्पादन किया जा रहा है।
-प्लाट नंबर 18 झंवर एसोसिएट्स में टेंप्रेचर हॉजिंग पार्ट के 200 नगों का निर्माण किया जाता है। 

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हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना

वर्ष 2003 में हाईकोर्ट ने आवासीय क्षेत्रों में चल रही फैक्टरियों का संचालन तत्काल प्रभाव से रोकने के निर्देश शासन को दिए थे। इसके बाद शासनादेश भी संबंधित विभागों को जारी किया गया। लेकिन इसके बाद भी कार्रवाई शून्य है। हाईकोर्ट के आदेशों की भी संबंधित विभाग अवहेलना कर रहे हैं। इससे साफ है कि इन व्यावसायिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने की मंशा प्रशासन की नजर नहीं आ रही है। 

कई इलाकों में फैला जाल

लिसाड़ी गेट क्षेत्र के अधिकांश घरों में ज्वलनशील पदार्थ का जखीरा है। लेकिन कोई भी कार्रवाई करने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रहा। प्रीत विहार में भी स्पोर्ट्स, केमिकल की फैक्टिरियां संचालित हैं। हाल ही में अमर उजाला ने स्थानीय निवासियों की शिकायत पर खबर प्रकाशित की थी। जिस पर एमडीए ने संज्ञान लेते हुए निर्माणाधीन फैक्टरियों पर सील लगाई थी।

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फैक्ट्री के बाहर लगा ताला - फोटो : अमर उजाला

प्रदूषण नियंत्रण विभाग, एमडीए, प्रशासन, नगर निगम के अधिकारी एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी

हमने इस फैक्टरी के लिए प्रदूषण नियंत्रण विभाग से अनुमति ले रखी है। वहीं, अन्य विभाग भी समय-समय पर यहां निरीक्षण के लिए आते रहते हैं। -महेश चंद शर्मा, संचालक सिलिंडर फैक्टरी

मेरे संज्ञान में यह मामला अब आया है। आवासीय कॉलोनी में भू-उपयोग बदलकर व्यावसायिक कार्य करने पर चालान होगा। इसके बाद सीलिंग के लिए भी संबंधित जोनल अधिकारी को निर्देश दिए जाएंगे। -राजेश कुमार पांडेय, उपाध्यक्ष एमडीए

हम रजिस्टर्ड फैक्टरियों में जाकर सुरक्षा और कर्मचारियों के स्वास्थ्य की जांच करते हैं। लेकिन इस क्षेत्र का कोई भी कारखाना हमारे यहां रजिस्टर्ड नहीं हैं। हमारी भूमिका तो काफी बाद में आती है। -सुभाष चंद विश्वकर्मा, उप निदेशक, कारखाना विभाग

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निगम का काम टैक्स वसूली करना है। कहीं जेनरेटर चल रहा है तो यह प्रदूषण नियंत्रण विभाग का काम है। यदि किसी औद्योगिक इकाई के बाहर सड़क पर जनरेटर रखा है तो निगम उसे हटवा सकता है। -राजेश कुमार, संपत्ति अधिकारी नगर निगम

शासनादेश-2003 के अनुसार पहले कार्रवाई विकास प्राधिकरण को करनी चाहिए। इसके बाद हम कार्रवाई करेंगे। यह शासनादेश में स्पष्ट है। हम समय-समय पर निरीक्षण कर प्रशासन को रिपोर्ट देते हैं। - आरके त्यागी, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी

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