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प्रियम की कप्तानी में पाकिस्तान चित, पिता बोले- फाइनल जीतकर लौटेगा बेटा, पढ़िए- और भी बहुत कुछ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: कपिल kapil
Updated Wed, 05 Feb 2020 02:48 AM IST
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भारतीय अंडर 19 टीम
- फोटो : सोशल मीडिया
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भारतीय टीम के स्टार क्रिकेटर प्रियम गर्ग के नेतृत्व वाली टीम ने मंगलवार को अंडर-19 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पाकिस्तान को दस विकेट से हराकर बड़ी जीत हासिल की है। इस बीच प्रियम गर्ग के पिता नरेश गर्ग ने कहा कि बेटा फाइनल मैच जीतकर लौटेगा। आइए इस खुशी के मौके पर हम आपको प्रियम के संघर्ष की उस कहानी के बारे में बताते हैं जिसे शायद ही आप जानते हों, अगली स्लाइडों में पढ़िए-
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प्रियम गर्ग
- फोटो : अमर उजाला
मूलरूप से मेरठ के किला परीक्षितगढ़ निवासी, प्रियम गर्ग महज आठ साल की उम्र से ही क्रिकेट खेलने लगे थे। पिता नरेश गर्ग ने बताया कि गांव के स्कूली मैदान में वो दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने जाता था।
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प्रियम गर्ग
- फोटो : अमर उजाला
कुछ लोगों ने उन्हें बताया कि प्रियम बल्लेबाजी बहुत अच्छी करता है, उसकी प्रतिभा निखरे इसके लिये वह मेरठ में उसको क्रिकेट एकेडमी ज्वॉइन कराएं। लेकिन प्रियम के पिता नेरश गर्ग साईकिल से घर-घर जाकर दूध बेचकर आजीविका चलाते थे। उनके लिए यह मुश्किल था।
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प्रियम के पिता नरेश गर्ग, दो बड़ी बहनें और भाई शिवम
- फोटो : अमर उजाला
नरेश गर्ग ने बताया उनकी आर्थिक स्थिति सामान्य थी, न ही कोई मजबूत सोर्स था। जिससे वह अपने बेटे का एडमिशन मेरठ में करा सकें। गांव के लोगों ने हौसला बढ़ाया तो कुछ दिनों बाद पिता नरेश ने भामाशाह पार्क में कोच संजय रस्तोगी से मुलाकात की। कोच संजय रस्तोगी ने प्रियम की बल्लेबाजी देखी तो उन्हें उसके अंदर भविष्य का अच्छा क्रिकेटर नजर आया।
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प्रियम गर्ग
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद पिता नरेश गर्ग ने प्रियम को एकेडमी ज्वॉइन करा दी। फिर पिता ने बेटे प्रियम गर्ग को अच्छा क्रिकेटर बनाने के लिये दिन-रात मेहनत की। प्रतिदिन किला परीक्षितगढ़ से मेरठ भेजने और उसको वापस लाने की जिम्मेदारी भी बड़ी थी। क्योंकि 2009 में साधनों की कमी के चलते कई बार साइकिल से भी मेरठ आना पड़ता था।
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