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हाशिमपुरा नरसंहार: 31 साल बाद मिला इंसाफ, पीड़ित के पिता ने बयां किया दर्द, कही ये बात

Wed, 31 Oct 2018 04:45 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Wed, 31 Oct 2018 04:45 PM IST
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hashimpura massacre delhi high court verdict pac accused and Jamaluddin welcomes decision
फाइल फोटो

हाशिमपुरा नरसंहार मामले में 31 साल बाद 42 पीड़ित परिवारों को इंसाफ मिल गया है। इस मामले में बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एस मुरलीधर एवं न्यायमूर्ति विनोद गोयल की पीठ ने निचली अदालत के उस फैसले को पलट दिया जिसमें उसने आरोपियों को बरी कर दिया था। हाईकोर्ट ने प्रादेशिक आर्म्ड कॉन्स्टेबुलरी (पीएसी) के 16 पूर्व जवानों को हत्या, अपहरण, आपराधिक साजिश और सबूतों को नष्ट करने का दोषी करार दिया। अदालत ने सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

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मेरठ न्यूज

वहीं 1987 हाशिमपुरा नरसंहार को लेकर पीड़ित के पिता जमालुद्दीन ने कोर्ट के फैसला का स्वागत करते हुए कहा कि हम बहुत खुश है। उन्होंने कहा हाईकोर्ट का आदेश हमारे पक्ष में है। हमने 31 साल तक इंतजार किया है। दोषियों को आखिरकार सजा दे दी गई।

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मेरठ न्यूज

इस मामले में तत्कालीन गृह राज्य मंत्री पी चिदंबरम की कथित भूमिका का पता लगाने के लिए आगे जांच की मांग को लेकर भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर भी फैसला सुरक्षित रखा। 28 साल चले मुकदमे में 21 मार्च 2015 को तीस हजारी कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए आरोपी 16 जवानों को बरी कर दिया था।

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फाइल फोटो

इसी साल मुड़ा केस का रुख
दिल्ली हाईकोर्ट में एनएचआरसी की अपील पर केस का रुख इसी साल 28 मार्च को तब मुड़ा, जब घटना के समय पुलिस लाइन में तैनात रणवीर सिंह विश्नोई (78) पेश हुआ और उसने तीस हजारी कोर्ट में अतिरिक्त साक्ष्य के तौर पर पुलिस की जनरल डायरी पेश की। सेशन कोर्ट ने माना था कि हाशिमपुरा से पीएसी के ट्रक में 40-45 लोगों को अगवा किया था और इनमें से 42 लोगों को गोलियां मारकर मुरादनगर गंगनहर में फेंका गया।

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मेरठ न्यूज

कोर्ट में पेश जीडी में 22 मई 1987 की सुबह 7.50 बजे लिसाड़ी गेट थानांतर्गत पिलोखड़ी पुलिस चौकी पर पीएसी भेजे जाने, पीएसी जवानों, शस्त्रों और गोलियों का ब्यौरा दर्ज था। पीएसी के 17 जवानों सुरेंद्र पाल सिंह, निरंजन लाल, कमल सिंह, श्रवण कुमार, कुश कुमार, एससी शर्मा, ओम प्रकाश, समीउल्लाह, जयपाल, महेश प्रसाद, राम ध्यान, लीलाधर, हमवीर सिंह, कुंवर पाल, बुद्ध सिंह, बसंत वल्लभ और रामबीर सिंह के नाम हैं।

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