शामली के कैराना में राज मिस्त्री के पास मजदूरी करने वाला मुकीम काला कुछ ही समय में जरायम की दुनिया में दहशत का दूसरा नाम बन गया था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में लूट, डकैती, हत्या की वारदातों को अंजाम देकर आतंक मचाया।
कैराना क्षेत्र के गांव जहानपुरा निवासी मुकीम काला ने राज मिस्त्री के पास मजदूरी करते हुए अपराध की दुनिया में कदम रखा था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हरियाणा के पानीपत में उसने डकैती की वारदात कर अपराध की दुनिया में कदम रखा। इसके बाद उसने अपराध की दुनिया में कदम बढ़ाते हुए लूट व राहजनी की घटनाएं कीं। कैराना में 2013 में चार व्यापारियों से रंगदारी मांगने के मामले में मुकीम सुर्खियों में आया था। इसके बाद 2014 में कैराना के दो व्यापारियों की दिनदहाड़े हत्या करने के मामले में मुकीम गैंग का नाम सामने आया था।
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मेराज अली, मुकीम काला, अंशुल दीक्षित
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पुलिस के मुताबिक, मुकीम काला के गिरोह में अधिकतर बदमाश शामली व सहारनपुर जनपद के शामिल रहे। अकेले शामली जिले में मुकीम पर हत्या के चार, आर्म्स एक्ट के दो, लूट डकैती के आठ, गैंगस्टर के दो, जानलेवा हमला करने पांच, रंगदारी के दो और अदालत के आदेश की अवहेलना करने के तीन मुकदमे दर्ज हैं।
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मुकीम काला और चित्रकूट जेल का फाइल फोटो
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एसपी सुकीर्ति माधव ने बताया कि मुकीम गैंग के लगभग सभी बदमाश जेल में हैं। अगर कोई बदमाश अब भी उसके संपर्क में रहा है, तो उसे चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी।
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चित्रकूट जेल।
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राहुल के परिजन बोले, हुआ इंसाफ
मुकीम काला गैंग की पांच जून 2013 में सहारनपुर पुलिस से मुठभेड़ हो गई थी। जिसमें सीओ के हमराह ढिकौली गांव निवासी सिपाही राहुल ढाका को मुकीम काला ने गोली मार दी थी। राहुल मौके पर ही शहीद हो गए थे। इसके बाद राहुल का परिवार पूरी तरह टूट गया। राहुल के पिता चंद्रपाल ढाका की मृत्यु भी 2019 में हो गई। घर में मां हरबेजी व दो भाई और एक बहन रह गए। सहारनपुर में राहुल की हत्या का मुकदमा चल रहा है।
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खंडहर पड़ा मुकीम काला का घर।
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परिजनों को सरकार और कानून पर विश्वास है। उन्हें उम्मीद थी कि न्याय जरूर मिलेगा। शुक्रवार को मुकीम काला की हत्या की खबर आई तो उनके चेहरे पर सुकून दिखाई दिया। उनका कहना है कि भगवान ने उन्हें इंसाफ दे दिया। राहुल के ताऊ राजपाल ढाका सेना में थे। उन्होंने वर्ष 1962 और 1971 के युद्ध में भाग लिया था।