सालों से मेरठ के शोभापुर में प्रवास कर रहे सारस के एक जोड़े के साथी का शिकार कर लिया गया। साथी के वियोग में दूसरा सारस महीनों से आंसू बहा रहा था। दिन रात उसकी तेज आवाज सुनकर तालाब के पास रहने वाले किसान भी दुखी हो रहे थे। इससे पहले कि वो अपने साथी के वियोग में प्राण त्याग देता उसे एक नए सारस ने अपना लिया।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
अब ये जोड़ा रोज खेतों में अठखेलियां करता नजर आ रहा है। तालाब के पास रहने वाले किसानों ने अब इनकी देखरेख और निगरानी शुरू कर दी है।
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प्रदेश के राजकीय पक्षी सारस के संरक्षण के लिए वन विभाग 20 नवंबर के बाद जिले में इनकी गणना शुरू करने जा रहा है। पिछले रिकॉर्ड के मुताबिक, हस्तिनापुर में 25 सारस हैं। सारस को लेकर आर्नीथोलिजिस्ट डॉ. रजत भार्गव ने बताया कि शोभापुर के तालाब में सारस का करीब 50 सालों से बसेरा है। तालाब में रहने वाले सारस के बारे में पास ही के फॉर्म हाउस मालिक से बात की गई तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। इस दुर्लभ पक्षी के शिकार का सच उजागर हुआ।
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रिटायर्ड ब्रिगेडियर का परिवार करता है देखभाल
शोभापुर गांव के बाहर रिटायर ब्रिगेडियर ज्ञान सिंह का फॉर्म हाउस है। ज्ञान सिंह माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने वाली टीम के मुखिया थे। उन्हें राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया था। ज्ञान सिंह के पोते रंजीत सिंह मांगट यहां पर खेती करते हैं।
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करीब 45 वर्षीय रंजीत सिंह ने बताया कि वह बचपन से यहां सारस देखते आ रहे हैं। पहले यहां छह तक सारस थे। पिछले साल यहां पर सारस के दो बच्चे भी पैदा हुए। बड़े होने पर वे जोड़ा बनाने के लिए कहीं और चले गए। उसके बाद से यहां पर दो सारस थे। करीब तीन माह पहले उन्होंने दिन-रात सारस की तेज आवाज सुनी तो वे तालाब के पास गए। उन्होंने देखा कि अकेली सारस तेज आवाज में रो रही थी।