पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के दो अधिकारियों के धरे जाने के बाद मेरठ में जुमे की नमाज के बाद हुए हिंसक बवाल को लेकर कई बड़े खुलासे हुए हैं। लिसाड़ीगेट पुलिस ने पीएफआई से जुड़े लिसाड़ी गेट निवासी अमजद और जावेद को गिरफ्तार किया है। जिनसे पूछताछ में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। आगे जानें आखिर कैसे कई माह पहले से बुना जा रहा था मेरठ बवाल का तानाबाना
बड़ा खुलासा: अयोध्या प्रकरण पर फैसले के बाद से पीएफआई बुन रही थी बवाल का तानाबाना, ऐसे भड़काया माहौल
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पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) द्वारा मेरठ समेत कई जिलों में माहौल भड़काने का तानाबाना अयोध्या प्रकरण में फैसला आने के बाद से बुना जा रहा था। जिसे नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में अंजाम दे दिया गया। इस संगठन के दो आरोपियों के धरे जाने के बाद कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने बताया कि नौ नवंबर को अयोध्या पर फैसले आने के बाद पीएफआई की बैठक हुई थी। जिसमें लोगों को भड़काने की योजना बनी थी।
20 दिसंबर को जुमे की नमाज से एक सप्ताह पहले से टेंपो और ई-रिक्शा से लेकर दीवारों पर भड़काऊ पोस्टर लगवाए जा रहे थे। धार्मिक स्थलों में भी आपत्तिजनक पर्चे बांटकर 20 दिसंबर को जुमे के बाद ज्यादा से ज्यादा भीड़ जमा होने की अपील की जा रही थी।
उसके बाद राज्यसभा में सीएए की मंजूरी के बाद हमारे लोगों ने शहर के लोगों से संपर्क करना शुरू किया था। तमाम वाहनों और दीवारों पर विवादित पोस्टर लगाए थे। इन पोस्टर पर लिखा था कि ‘कभी हम भूल न जाएं, याद रखना पहला डिफेंस’। 20 दिसंबर को सीएए की मंजूरी के बाद पहला जुमे पर बवाल कराने की योजना थी। इसके बाद देशभर में बवाल कराना था।
19 दिसंबर और 20 दिसंबर की सुबह लोगों को भड़काया गया। जुमे पर बाजार बंद रखने को कहा गया। सभी धार्मिक स्थलों में नमाज के बाद सीएए के खिलाफ प्रदर्शन करना था। पीएफआई से जुड़े कई लोग जामा मस्जिद सहित कई जगहों पर पहुंचे। काली पट्टी बांधकर सीएए के खिलाफ पोस्टर लेकर धार्मिक स्थल से निकले थे।
पुलिस ने वहां तो स्थिति संभाल ली थी। लेकिन बाद की प्लानिंग पुलिस प्रशासन नहीं समझ पाया। पुलिस के जाने के बाद भीड़ सड़क पर उतरीं। पुलिस पर पथराव किया और गोलियां चलाई। वहीं पुलिस ने लिसाड़ी रोड स्थित ट्यूबवेल पर डेरा डाल लिया है। लिसाड़ीगेट में दो और मुकदमे दर्ज कराए गए हैं।
ऐसे भी भड़काया था माहौल
पीएफआई से जुड़े आरोपियों ने बताया कि विवादित ढांचा और अन्य मुद्दों का हवाला देकर लोगों को भड़काया था। लोगों को उकसाकर बवाल कराया था।