मेरठ में यदि प्रत्यक्षदर्शी पुलिस को गंगनहर में कार गिरने की सूचना नहीं देते और मोबाइल व फेसबुक की नियर बाई लोकेशन न मिलती तो तीन दोस्तों की मौत का राज हमेशा के लिए नहर में ही दफन हो जाता। अगली स्लाइडों में तस्वीरों के साथ जानिए पूरा अपडेट:-
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हादसे के बाद क्षतिग्रस्त कार
- फोटो : अमर उजाला
मोबाइल फोन की लोकेशन के आधार पर पुलिस और परिजनों ने आस नहीं छोड़ी, यही कारण रहा कि बुधवार को आखिरकार तीनों कारोबारियों दोस्तों के शव बरामद हो गए।
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हादसे के बाद क्षतिग्रस्त कार
- फोटो : अमर उजाला
सोमवार को ‘अमर उजाला’ में समाचार प्रकाशित होने पर परिजनों ने सीओ सरधना से संपर्क किया था तो गंगनहर में कार गिरने का पता चला। परिजनों ने रविवार सुबह जब तीनों कारोबारी दोस्तों विवेक वर्मा, हनी सेतिया और हरिनेक सिंह के मोबाइल फोन पर कॉल की तो वे स्विच ऑफ आ रहे थे। परिजनों की बेचैनी बढ़ती गई। सोमवार दोपहर को परिजन सरधना गंगनहर पर पहुंचे तो वह पुलिस अफसरों के सामने भावुक हो गये।
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गंग नहर में गिरी कार
- फोटो : अमर उजाला
सीओ सरधना पंकज सिंह ने बताया कि विवेक वर्मा के मोबाइल की लोकेशन कार गिरने की जगह की निकली। जबकि हरिनेक और हनी सेतिया के मोबाइल की लोकेशन हादसा स्थल से करीब एक किमी दूर आई। ऐसे में परिजनों को भी अंदेशा होने लगा कि हो सकता है कि कार गिरी हो। इनके परिजन इंद्रजीत व राजेश यादव मौके पर बार-बार पुलिस से यही पूछते रहे कि क्या कार गिरी है या नहीं।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
पल भर में खत्म तीनों जिंदगी
सीओ का कहना है कि विवेक और हनी की बचपन की दोस्ती थी। वहीं हरिनेक सिंह भी दोनों का मित्र था। तीनों का घर पर आना-जाना था। जब भी कहीं जाना होता था तो तीनों एक साथ ही जाते थे। शनिवार रात को भी हरिद्वार के लिए निकले थे और कहा था कि रविवार शाम तक लौट आएंगे। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि पल भर में ही मौत झपट्टा मार लेगी। तीनों के लापता होने के बाद से ही परिजन बेचैन थे। बुधवार दोपहर को जब तीनों दोस्तों के शव मिले तो परिजनों में कोहराम मच गया। शव देखकर परिजन दहाड़ मारकर रोने लगे। मेडिकल मोर्चरी पर भी परिजन और रिश्तेदार पहुंचे। रात में ही पुलिस ने शवों का पोस्टमार्टम कराया।