भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) की मुश्किलें अभी और बढ़ेंगी। भारतीय किसान यूनियन को अगले दस दिन के भीतर फिर से तगड़ा झटका लग सकता है। भाकियू को पश्चिमी यूपी में नया संगठन चुनौती दे सकता है। चर्चा है कि भाकियू अराजनैतिक वेस्ट यूपी में सेंधमारी की तैयारी कर रहा है। वहीं नए संगठन में संरक्षक बनाए गए गठवाला खाप के चौधरी राजेंद्र मलिक के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। अब रणनीतिकार गुणा-भाग करने में जुट गए हैं।
BKU Split: बड़ी मुश्किल में भाकियू, दस दिन के भीतर फिर लग सकता है तगड़ा झटका, पढ़िए पूरी रिपोर्ट
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नया संगठन बनाने के बाद भाकियू के प्रभाव वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खुद को साबित करना चुनौती भरा होगा। ऐसे में रणनीतिकारों ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, मुरादाबाद, अलीगढ़ और मेरठ मंडल में सदस्यता अभियान चलाने पर काम शुरू कर दिया है। इसके अलावा भाकियू के कई बड़े चेहरे भी अपने पुराने साथियों के संपर्क में है। अगले 10 दिन में भाकियू अराजनैतिक अपना विस्तार कर कार्यकारिणी का एलान कर सकती है।
नए संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश चौहान, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मांगेराम त्यागी, राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक, राष्ट्रीय महासचिव अनिल तालान, प्रदेश अध्यक्ष हरिनाम सिंह वर्मा, प्रदेश अध्यक्ष राजवीर सिंह और युवा विंग के अध्यक्ष दिगंबर सिंह लंबे समय तक भाकियू से जुड़े रहे हैं।

राजेंद्र मलिक के सामने सबसे बड़ी चुनौती
नए संगठन में संरक्षक बनाए गए गठवाला खाप के चौधरी राजेंद्र मलिक के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। खाप के थांबेदारों को एक मंच पर लाने और नए संगठन से जोड़ना भी उनके लिए आसान नहीं होगा। गठवाला खाप में नए संगठन को मजबूती देने की जिम्मेदारी राजेंद्र सिंह मलिक पर होगी।
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पश्चिम में कौन बनेगा चेहरा
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सहारनपुर और मेरठ मंडल से बड़े किसान आंदोलन हुए हैं। भाकियू अराजनैतिक के लिए पश्चिम में किसानों के बीच स्वीकार्यता वाले चेहरे की तलाश करनी होगी। संगठन की रणनीतिकार भाकियू छोड़कर गए पुराने चेहरों को लेकर मंथन कर रही है। जल्द ही इस पर फैसला होगा।
आखिरी सांस तक जारी रहेगी लड़ाई : टिकैत
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने ट्वीट कर कहा कि सरकारों का काम होता है किसान आंदोलन को तोड़ना, फूट डालना या कमजोर करना। हमारा धर्म है किसानों की आवाज को और बुलंद करना। उनके अधिकारों की रक्षा करना। आखिरी सांस तक किसानों की लड़ाई जारी रहेगी।