यूपी के मुजफ्फरनगर में करनाल के फरीदपुर में व्यापारी महेंद्र जुनेजा की लंबी बीमारी से मौत के बाद परिवार और रिश्तेदार गमजदा थे। अस्थियां विसर्जित करने के लिए दो कारों में 11 लोग सवार होकर हरिद्वार के लिए निकले। बुधवार सुबह साढ़े छह बजे मौत ने बघरा बाईपास पर झपट्टा मारा तो जिंदगी फिर बेबस हो गई। फरीदपुर से जट मुझेड़ा में पोस्टमार्टम हाउस तक आंसू, अफसोस और मातम छाया रहा।
पानीपत-खटीमा हाईवे के ढाबे पर लगे सीसीटीवी कैमरे में मौत का लम्हा भी कैद हुआ। हाईवे पर फर्राटा भर रही कार एकाएक अनियंत्रित हो गई। सिर्फ पांच सेकंड में छह लोगों की मौत ने सबको झकझोर कर रख दिया। पिछली सीट पर बैठे हार्दिक (17) की जान बच गई।
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ट्रक के पीछे से टकराई कार।
- फोटो : अमर उजाला
फरीदपुर मंदिर कमेटी से जुड़े पुष्कर कहते हैं कि अब जिंदगीभर के आंसू रह गए हैं। कोई ऐसी कल्पना भी नहीं कर सकता। पूरे गांव पर ही नहीं, बल्कि क्षेत्र पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा। परिवार और रिश्तेदार पानीपत और करनाल से एक साथ चले थे, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था।
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विलाप करते परिजन।
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पानीपत से आए भीम जुनेजा बोले कि अब कहने के लिए क्या बचा है। पहले बीमारी से परिवार का मुखिया चला गया और अब हादसे में छह लोगों की मौत रुलाने वाली है। बच्चों को हिम्मत बंधाते हुए बड़ों का सब्र यहां जवाब दे रहा है। पानीपत से आए हेमंत ने कहा कि परिवार पर गम का पहाड़ टूट पड़ा है।
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रोते-बिलखते परिजन।
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हार्दिक को पानीपत में कराया गया भर्ती
हादसे में गंभीर घायल हुए हार्दिक को बघरा सीएचसी से जिला अस्पताल के लिए रेफर किया गया था। यहां उपचार के बाद हालत गंभीर दिखने पर पानीपत के लिए रेफर कर दिया गया। परिवार के सदस्य उसे लेकर पानीपत चले गए।
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हादसे के बाद कार का ये हाल हो गया।
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कैसे रुकते आंसू... हाईवे पर इधर-उधर पड़े थे अपने
दूसरी गाड़ी में पीछे चल रहे दिवंगत महेंद्र जुनेजा के भाई सुरेंद्र, हातम प्रकाश और बहन मंजू हादसे के बाद सकते में आ गए। लोगों की मदद से एक-एक कर कार में फंसे पीड़ितों को निकाला। हाईवे पर अपनों की जिंदगी टूटते देख चुके परिवार के आंसू नहीं थमे।