मुजफ्फरनगर दंगे में बागपत जिला भी झुलस गया था। वाजिदपुर गांव में बच्चे समेत दो लोगों की हत्या हो गई थी। दहशत के चलते मृतक बच्चे के परिवार ने गांव से पलायन कर दिया था। एक मृतक के परिजन अभी भी गांव में रहते है। उनका कहना है कि बुरा वक्त बीत गया है, अब वह दुआ करते हैं कि गांव में हमेशा अमन-चैन रहना चाहिए।
दंगे के जख्म को भूल गया परिवार, अब नहीं चाहते घाव कुरेदना, देखिए तस्वीरें
वाजिदपुर गांव में आठ सितंबर 2013 की रात में धार्मिक स्थल में फायरिंग हुई थी। गोली लगने से किशोर शोएब पुत्र नदीम की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि इकबाल गोली लगने से घायल हो गया था। बाद में इकबाल की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। शोएब के परिजनों ने गांव से पलायन कर दिया था।
ग्रामीणों के अनुसार वर्षों से उनका गांव में स्थित मकान सुनसान पड़ा है, वे इस समय दिल्ली के दिलशाद गार्डन में रहते है, दंगे के बाद से आज तक गांव नहीं लौटे। कभी-कभार फोन पर मोहल्ले के लोगों से बातचीत कर लेते हैं।
उधर, दूसरे मृतक इकबाल पुत्र कबूल का परिवार गांव में रहता है। इकबाल के चार बेटे मोमीन, इलियास, शौकीन, नौशाद व चार बेटी रूकसाना, अफसाना, मोमीना, नसीमा है। मृतक के बेटे मोमीन और इलियास कहते हैं कि बुरे दिन थे, बीत गए।
हम भूल जाना चाहते हैं हर बात
नगर के केतीपुरा की नई बस्ती में रह रहे मुजफ्फरनगर के मोहम्मदपुर राय सिंह निवासी मेहरदीन का कहना है कि बुरा वक्त बीत गया। गांव और जिला छूटा। जिंदगी पटरी पर लौट रही है। पलायन कर यहां आए थे। अब हम हर बात को भूल जाना चाहते हैं। सरकार से उम्मीद है कि बस हमारी मदद जरूर करें।
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