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देश के पांच सबसे बड़े संसदीय क्षेत्रों में यूपी का ये शहर भी शामिल, इस वजह से मिला ये स्थान
Mon, 15 Apr 2019 04:12 PM IST
शिखा पांडेय
अनुराग मिश्रा, अमर उजाला, कानपुर
अनुराग मिश्रा, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 15 Apr 2019 04:12 PM IST
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फाइल फोटो
कलम और तलवार के धनी यूपी में उन्नाव जिले के लोगों के लिए गर्व करने के लिए एक और वजह भी है। वह है देश की पांच सबसे ज्यादा मतदाता वाले संसदीय क्षेत्रों में उन्नाव चौथे नंबर पर है। यह गौरव तब हासिल हुआ जब 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद हुए परिसीमन में उन्नाव जिले के दो विधानसभा क्षेत्रों को मोहनलालगंज संसदीय क्षेत्र से हटाकर उन्नाव संसदीय क्षेत्र में शामिल कर दिया गया।
लोकसभा चुनाव 2019
- फोटो : अमर उजाला
2009 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्नाव जिले के पुरवा और हसनगंज (अब मोहान) विधानसभा क्षेत्र लखनऊ जिले के मोहनलालगंज संसदीय क्षेत्र में शामिल थे। वर्ष 2007 में निर्वाचन आयोग ने परिसीमन कराया था।
इस परिसीमन में पुरवा और तब के हसनगंज विधानसभा क्षेत्र को उन्नाव संसदीय क्षेत्र से जोड़ दिया गया। मतदाता संख्या के लिहाज से उन्नाव को देश के पांच सबसे बड़े संसदीय क्षेत्रों में चौथा स्थान मिला है।
इस परिसीमन में पुरवा और तब के हसनगंज विधानसभा क्षेत्र को उन्नाव संसदीय क्षेत्र से जोड़ दिया गया। मतदाता संख्या के लिहाज से उन्नाव को देश के पांच सबसे बड़े संसदीय क्षेत्रों में चौथा स्थान मिला है।
फाइल फोटो
इतिहास पर एक नजर
1952 में उन्नाव लोकसभा सीट को रायबरेली और हरदोई के कुछ क्षेत्रों को शामिल करके बनाया गया था। 1957 में उन्नाव लोकसभा सीट बनी और हरदोई व रायबरेली के भाग को अलग कर दिया गया। तब उन्नाव संसदीय क्षेत्र में 7 विधानसभा क्षेत्र थे। इनमें बांगरमऊ, सफीपुर, हसनगंज, उन्नाव सदर, पुरवा, भगवंतनगर और हड़हा विधानसभा क्षेत्र बने। हालांकि इनमें से दो विधानसभा क्षेत्र हसनगंज और पुरवा मोहनलालगंज संसदीय क्षेत्र का हिस्सा बने थे।
2007 में हुए पुन: परिसीमन में हड़हा विधानसभा क्षेत्र को समाप्त कर दिया गया। इस क्षेत्र के गांवों को उन्नाव सदर और भगवंतनगर विधानसभा क्षेत्र में शामिल कर दिया गया। जबकि हसनगंज विधानसभा क्षेत्र के कुछ हिस्सों को सफीपुर व पुरवा में जोड़कर मोहान विधानसभा क्षेत्र नाम दिया गया। इसके साथ ही 2007 से पूरा उन्नाव जिला एक संसदीय क्षेत्र है।
1952 में उन्नाव लोकसभा सीट को रायबरेली और हरदोई के कुछ क्षेत्रों को शामिल करके बनाया गया था। 1957 में उन्नाव लोकसभा सीट बनी और हरदोई व रायबरेली के भाग को अलग कर दिया गया। तब उन्नाव संसदीय क्षेत्र में 7 विधानसभा क्षेत्र थे। इनमें बांगरमऊ, सफीपुर, हसनगंज, उन्नाव सदर, पुरवा, भगवंतनगर और हड़हा विधानसभा क्षेत्र बने। हालांकि इनमें से दो विधानसभा क्षेत्र हसनगंज और पुरवा मोहनलालगंज संसदीय क्षेत्र का हिस्सा बने थे।
2007 में हुए पुन: परिसीमन में हड़हा विधानसभा क्षेत्र को समाप्त कर दिया गया। इस क्षेत्र के गांवों को उन्नाव सदर और भगवंतनगर विधानसभा क्षेत्र में शामिल कर दिया गया। जबकि हसनगंज विधानसभा क्षेत्र के कुछ हिस्सों को सफीपुर व पुरवा में जोड़कर मोहान विधानसभा क्षेत्र नाम दिया गया। इसके साथ ही 2007 से पूरा उन्नाव जिला एक संसदीय क्षेत्र है।
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लोकसभा चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
देश के पांच सर्वाधिक मतदाता संख्या वाले संसदीय क्षेत्र
लोकसभा क्षेत्र राज्य मतदाता संख्या विधानसभा क्षेत्र
मल्काजगिरि तेलंगाना 3183325 07
गाजियाबाद उत्तर प्रदेश 2728084 05
बंगलुरू कर्नाटक 2401472 08
उन्नाव उत्तर प्रदेश 2177079 06
उत्तर पश्चिमी दिल्ली 2194343 10
लोकसभा क्षेत्र राज्य मतदाता संख्या विधानसभा क्षेत्र
मल्काजगिरि तेलंगाना 3183325 07
गाजियाबाद उत्तर प्रदेश 2728084 05
बंगलुरू कर्नाटक 2401472 08
उन्नाव उत्तर प्रदेश 2177079 06
उत्तर पश्चिमी दिल्ली 2194343 10
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फाइल फोटो
- फोटो : Amar Ujala
उन्नाव जिले पर एक नजर
जनसंख्या 3464387
पुरुष 1816792
महिला 1647595
कुल मतदाता - 2177079
महिला मतदाता- 983468
पुरुष मतदाता- 1193514
युवा मतदाता- 165929 (18 से 19 वर्ष)
जनसंख्या 3464387
पुरुष 1816792
महिला 1647595
कुल मतदाता - 2177079
महिला मतदाता- 983468
पुरुष मतदाता- 1193514
युवा मतदाता- 165929 (18 से 19 वर्ष)