सड़क हादसे से कोरथा गांव में कोहराम मच गया। रविवार सुबह गांव से जब 26 अर्थियां उठीं तो पूरा गांव चीखों से थर्रा उठा। जिन लोगों ने अपनों को खोया वे कभी रोते-रोते सन्नपात में चले जाते तो कभी अचानक से चीख पड़ते। शनिवार रात से लेकर गांव में गम और मातम पसरा हुआ है।
कोरथा में कोहराम: एक साथ उठीं 26 अर्थियां तो थर्रा उठा गांव, किसी ने बेटे को खोया तो किसी ने मां को
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हादसे में गांव के 26 लोगों की मौत हो गई थी। इसमें आठ बच्चे, पांच किशोरियों व 13 महिलाएं हैं। सीएचसी भीतरगांव से पोस्टमार्टम के बाद एक-एक कर शव गांव लाए गए। जैसे-जैसे शव गांव पहुंचते गए, लोगों की भीड़ जुटना शुरू हो गई। चीखों और चीत्कार से गांव गूंजने लगा।
‘एक बार हमरे लाल का मुंह तो दिखा देव’
गांव के किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला। क्योंकि ऐसा कोई घर नहीं जिसने अपने को खोया न हो। शव पहुंचते ही परिजनों ने घेर लिया। हर कोई अपने बेटे, मां, बहन, भाई की एक झलक देखना चाहता था। लोग जब शव उठाकर चलने लगे तो महिलाएं पीछे-पीछे दौड़ पड़ीं और रोते-रोते कह रहीं थीं कि ‘एक बार हमरे लाल का मुंह तो दिखा देव..., हमरी बिटिया से कहि देव एक बार हम तो बात तो करि लेव...। हादसे का दंश झेलने वाले तीन परिवार ऐसे हैं, जो पूरी तरह से उजड़ गए। केवल एक-एक पुरुष ही बचा है।
दर्जनों गांव के लोग जुटे, दुख बांटा, सांत्वना दी
जिले का शायद यह पहला हादसा है, जब इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है। यह सुनकर आसपास के गांवों के लोग भी कोरथा पहुंचे थे। पीड़ितों का दुख दर्द बांटा और उन्हें सांत्वना देते रहे। अंतिम संस्कार में भी शामिल हुए।
राजू की मां और बेटी की भी मौत
मुंडन राजू के सात वर्षीय बेटे अभि का था। राजू खुद ट्रैक्टर चला रहा था। वह पूरी तरह से सुरक्षित है लेकिन उसकी बेटी रिया उर्फ दिव्या और मां रामजानकी की मौत हो गई।