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बेहमई में भयावह काली रात बनकर आई थी वो शाम, लाशें देख मची थी चीख पुकार, खून से लाल हुई थी धरती

Tue, 07 Jan 2020 01:43 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा डिजिटल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेहमई
डिजिटल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेहमई Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Tue, 07 Jan 2020 01:43 AM IST
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That evening came as a dark black night in Behmai
फूलन देवी का गिरोह
14 फरवरी आज के युवाओं के लिए वेलेंटाइन-डे के रूप में भले उत्सवी जोश लेकर आता है लेकिन बेहमई के लिए इस तारीख के मायने कुछ और ही हैं। यमुना किनारे बसे बेहमई में 14 फरवरी 1981 की शाम जब फूलन देवी ने गिरोह के साथ हमला किया था तो वो शाम कई घरों में हमेशा के लिए बड़ा अंधेरा पैदा कर गई थी। उस वक्त कोई गिरोह जब भी यमुना नदी पार करके जालौन या कानपुर की सीमा में प्रवेश करता था तो अक्सर बेहमई से होकर ही निकलता था।


 
That evening came as a dark black night in Behmai
फूलन देवी - फोटो : अमर उजाला
डकैत खान-पान, रसद समेत तमाम प्रकार की जरूरतें यहीं के ग्रामीणों से पूरी करवाते थे। लालाराम गिरोह में जब कुसुमा नाइन और फूलन देवी शामिल थी, तब यहां आना - जाना खूब रहता था । उस वक्त गिरोह में विक्रम मल्लाह भी शामिल था। ग्रामीणों द्वारा सभी के चेहरे पहचाने जाने लगे थे। बाबू सिंह गुर्जर की हत्या के बाद जब विक्रम मल्लाह की हत्या की गई तो गिरोहों के बीच जातीय खाई बढ़ गई थी।

 
That evening came as a dark black night in Behmai
फूलन देवी
विक्रम को श्रीराम - लालाराम ने एक दिन धोखे से सोते समय मार डाला था। फूलन के साथ कई प्रकार से दुर्व्यवहार हुआ था। इसका बदला ही था जो फूलन के निशाने पर लालाराम ही नहीं पूरी ठाकुर बिरादरी थी और लालराम को पनाह देने के कारण बेहमई भी। 14 फरवरी 1981 को जब गांव के तमाम लोग खेतों पर थे और महिलाएं अपने काम-काज में व्यस्त थीं। खाकी वर्दी में आए डाकुओं को देख कोई ज्यादा इसलिए भी नहीं घबराया, क्योंकि बेहमई में डाकू आया-जाया करते थे।

 
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That evening came as a dark black night in Behmai
फूलन देवी - फोटो : अमर उजाला
गांव में किसी ने सोचा भी नहीं था कि आज बेहमई की धरती खूनी खेल से लाल हो जाएगी। फूलन ने गांव को घेरकर करीब 26 लोगों को बंधक बनाया था । सभी को गांव के बाहर लाकर गोलियां मारी गई थीं। बीस लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। दो ने बाद में दम तोड़ दिया था। पुलिस रिकार्ड में मृतक आंकड़ा 20 तक ही सीमित रहा था। डाकुओं के निशाने पर रहे 22 ग्रामीणों में 19 ठाकुर, दो कठेरिया और एक मुसलमान थे।

 
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That evening came as a dark black night in Behmai
फूलन देवी
राजाराम चंदेल और रोशन सिंह ने छिपकर देखा था खूनी मंजर
ग्रामीणों पर जब डकैत गोलियां बरसा रहे थे। बेहमई के ही राजाराम चंदेल और उनके चचेरे भाई रोशन सिंह अपने जानवरों को लेकर पानी पिलाने नदी पर ले गए थे। गोलियों की गूंज से दौड़े तो डकैतों की बंदूकों से गोलियों की बौछार देख दूर ठिठक गए। ओट लेकर खूनी मंजर देखा। सिकंदरा थाने में उनकी ओर से ही रिपोर्ट दर्ज कराने की पहल हुई थी।

 
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