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जयंती विशेष: जब नेता जी ने बुलंद किया 'तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा' का नारा

Tue, 23 Jan 2018 01:33 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Tue, 23 Jan 2018 01:33 PM IST
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 Subhash Chandra Bose Birthday Special
सुभाष चंद्र बोस की जयंती
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़ने के लिये उन्होंने जापान के सहयोग से आजाद हिंद फौज का गठन किया। उनके द्वारा दिया गया जय हिंद का नारा भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया है। "तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा" का नारा भी उनका ही दिया था जिसे आजतक लोग भूल नहीं पाये। जी हां हम बात कर रहे हैं महान क्रांतिकारी सुभाष चंद्र बोस के बारे में। 


23 जनवरी 1897 को ब्रितानी राज में बंगाल प्रेसीडेंसी ओड़िसा डिवीजन के कटक जिले में सुभाष चंद्र बोस का जन्म हुआ था। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि जब नेता जी ने जापान और जर्मनी से मदद लेने की कोशिश की थी तो ब्रिटिश सरकार ने अपने गुप्तचरों को 1941 में उन्हें ख़त्म करने का आदेश दिया था। नेता जी ने 5 जुलाई 1943 को सिंगापुर के टाउन हाल के सामने 'सुप्रीम कमाण्डर' के रूप में सेना को सम्बोधित करते हुए "दिल्ली चलो!" का नारा दिया और जापानी सेना के साथ मिलकर ब्रिटिश व कामनवेल्थ सेना से बर्मा सहित इम्फाल और कोहिमा में एक साथ जमकर मोर्चा लिया।

दिल्ली चलो का दिया नारा 

 Subhash Chandra Bose Birthday Special
सुभाष चंद्र बोस की जयंती

आरम्भ में इस फौज़ में उन भारतीय सैनिकों को लिया गया था जो जापान द्वारा युद्धबन्दी बना लिये गये थे। एक वर्ष बाद सुभाष चंद्र बोस ने जापान पहुँचते ही जून 1943 में टोकियो रेडियो से घोषणा की कि अंग्रेजों से यह आशा करना बिल्कुल व्यर्थ है कि वे स्वयं अपना साम्राज्य छोड़ देंगे। हमें भारत के भीतर व बाहर से स्वतंत्रता के लिये स्वयं संघर्ष करना होगा। इससे गद्गद होकर रासबिहारी बोस ने 4 जुलाई 1943 को 46 वर्षीय सुभाष को इसका नेतृत्व सौंप दिया। 5 जुलाई 1943 को सिंगापुर के टाउन हाल के सामने 'सुप्रीम कमाण्डर' के रूप में सेना को सम्बोधित करते हुए "दिल्ली चलो!" का नारा दिया और जापानी सेना के साथ मिलकर ब्रिटिश व कामनवेल्थ सेना से जमकर मोर्चा लिया। 

सेनापति बन स्वतंत्र भारत की सरकार बनायी 

 Subhash Chandra Bose Birthday Special
सुभाष चंद्र बोस की जयंती

21 अक्टूबर 1943 के सुभाष बोस ने आजाद हिन्द फौज के सर्वोच्च सेनापति की हैसियत से स्वतन्त्र भारत की अस्थायी सरकार बनायी। जिसे जर्मनी, जापान, फिलीपीन्स, कोरिया, चीन, इटली और आयरलैंड ने मान्यता दे दी। जापान ने अंडमान व निकोबार द्वीप  इस अस्थायी सरकार को दे दिये। सुभाष उन द्वीपों में गये और उनका नया नामकरण किया। अंडमान का नया नाम शहीद द्वीप तथा निकोबार का स्वराज्य द्वीप रखा गया।

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फहराया स्वतन्त्र भारत का ध्वज

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सुभाष चंद्र बोस की जयंती

30 दिसम्बर 1943 को इन द्वीपों पर स्वतन्त्र भारत का ध्वज भी फहरा दिया गया। 4 फ़रवरी 1944 को आजाद हिन्द फौज ने अंग्रेजों पर दोबारा भयंकर आक्रमण किया और कोहिमा, पलेल आदि कुछ भारतीय प्रदेशों को अंग्रेजों से मुक्त करा लिया।

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हिन्दुस्तान पहुंची आज़ाद हिंद फौज

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सुभाष चंद्र बोस की जयंती
6 जुलाई 1944 को उन्होंने रंगून रेडियो स्टेशन से गांधी जी के नाम जारी एक प्रसारण में अपनी स्थिति स्पष्ठ की और आज़ाद हिन्द फौज़ द्वारा लड़ी जा रही इस निर्णायक लड़ाई की जीत के लिये उनकी शुभकामनाएँ माँगीं। 21 मार्च 1944 को 'चलो दिल्ली' के नारे के साथ आज़ाद हिंद फौज का हिन्दुस्तान की धरती पर आगमन हुआ।
 
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