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70 साल के विजय का कोरोना विजय मंत्र, 'अमर उजाला' को बताया वायरस को कैसे किया चित
Sun, 12 Apr 2020 03:10 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
मनोज चौरसिया, अमर उजाला, कानपुर
मनोज चौरसिया, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 12 Apr 2020 03:10 AM IST
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ठीक होने के बाद अस्पताल से घर जाते कानपुर के पहले कोरोना संक्रमित मरीज
- फोटो : amar ujala
उम्र सत्रह हो या सत्तर की और बीमारी कोरोना हो या कोई और... मानसिक रूप से मजबूत हैं तो मुसीबतों को नहीं मिलना कोई ठौर। 70 की उम्र में कोरोना को धूल चटाने वाले एनआरआई सिटी के डायमंड टॉवर निवासी विजय नारायण राव ऐसे ही विचारों से भरे हैं। वह कहते हैं कि कोरोना से निपटने के लिए साफ-सफाई और सामाजिक दूरी के सिद्धांत का पालन करें।
मेडिकल स्टाफ ने तालियां बजाकर किया स्वागत
- फोटो : amar ujala
अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पौष्टिक आहार लेते रहें। मानसिक रूप से मजबूत रहें। यही करके उन्होंने इस उम्र में कोरोना को मात दी। छह अप्रैल को उर्सला अस्पताल से घर पहुंचने के बाद 14 दिन के क्वारंटीन पर हैं। बताया कि 14 मार्च को वह और उनकी पत्नी अमेरिका में छोटे बेटे के घर से लौटे थे। यहां पहुंचने पर दंपति अलग-अलग कमरे में क्वारंटीन हो गए थे।
तालियों की गूंज के साथ मेडिकल स्टाफ ने घर भेजा
- फोटो : amar ujala
अगले दिन बुखार होने पर उन्होंने खुद स्वास्थ्य विभाग को इसकी सूचना दी और संक्रामक रोग चिकित्सालय जांच कराने पहुंच गए, लेकिन उस दिन सैंपल नहीं दे पाए। 18 मार्च को सैंपल देने के बाद 21 को उन्हें कोरोना की पुष्टि हुई। इस दौरान अपने बेटे, बहू और दो पोतों से भी नहीं मिलते थे। सामाजिक दूरी बनाए रखने का नतीजा यह निकला कि पूरा परिवार कोरोना संक्रमण से बच गया।
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अमर उजाला को बताया कैसे कोरोना को हराया
- फोटो : amar ujala
आत्मविश्वास बनाए रखा, डॉक्टरों की बात मानते रहे
विजय नारायण बताते हैं कि 21 मार्च को कोरोना की पुष्टि होने पर उन्हें उर्सला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया था। उन्हें खांसी, तेज बुखार के साथ ही शरीर में दर्द था। थोड़ा घबराए जरूर, लेकिन एकदम से चिंता में भी नहीं डूब गए कि ये क्या हो गया। आत्मविश्वास बनाए रखा और डॉक्टरों के गाइडेंस को लगातार फॉलो करते रहे। दवाएं और गुनगुना पानी पीते रहे। फोन पर परिजनों से बातचीत के साथ धार्मिक पुस्तकें पढ़ते रहे, पौष्टिक भोजन करते रहे।
विजय नारायण बताते हैं कि 21 मार्च को कोरोना की पुष्टि होने पर उन्हें उर्सला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया था। उन्हें खांसी, तेज बुखार के साथ ही शरीर में दर्द था। थोड़ा घबराए जरूर, लेकिन एकदम से चिंता में भी नहीं डूब गए कि ये क्या हो गया। आत्मविश्वास बनाए रखा और डॉक्टरों के गाइडेंस को लगातार फॉलो करते रहे। दवाएं और गुनगुना पानी पीते रहे। फोन पर परिजनों से बातचीत के साथ धार्मिक पुस्तकें पढ़ते रहे, पौष्टिक भोजन करते रहे।
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ठीक होकर घर जाते कानपुर के पहले कोरोना संक्रमित मरीज
- फोटो : amar ujala
अपील : छिपाएं नहीं, डॉक्टर के पास जाएं
उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कोई बाहर से आया हो या किसी कोरोना मरीज के संपर्क में आया हो या ऐसी आशंका हो तो खुद को 14 दिन के लिए अपने घर में ही क्वारंटीन कर लें। इस दौरान यदि बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ आदि लक्षण प्रतीत हों तो तुरंत स्वास्थ्य विभाग से संपर्क कर या फ्लू ओपीडी पहुंचकर जांच कराएं। इससे न सिर्फ स्वयं स्वस्थ रह सकते हैं, बल्कि अपने परिजनों सहित सभी करीबियों को इस वायरस के संक्रमण से बचा सकते हैं।
उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कोई बाहर से आया हो या किसी कोरोना मरीज के संपर्क में आया हो या ऐसी आशंका हो तो खुद को 14 दिन के लिए अपने घर में ही क्वारंटीन कर लें। इस दौरान यदि बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ आदि लक्षण प्रतीत हों तो तुरंत स्वास्थ्य विभाग से संपर्क कर या फ्लू ओपीडी पहुंचकर जांच कराएं। इससे न सिर्फ स्वयं स्वस्थ रह सकते हैं, बल्कि अपने परिजनों सहित सभी करीबियों को इस वायरस के संक्रमण से बचा सकते हैं।