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यूपी: ‘खाकी’ और ‘खादी’ दोनों पर भारी राम बिहारी, चर्चाओं तक ही सिमटे रहे भाजपा नेता के सारे गुनाह

Sun, 17 Jan 2021 05:42 PM IST
शिखा पांडेय नीरज दीक्षित, अमर उजाला, जालौन
नीरज दीक्षित, अमर उजाला, जालौन Published by: शिखा पांडेय Updated Sun, 17 Jan 2021 05:42 PM IST
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Sexual harassment case of children, Jalaun news
पुलिस गिरफ्त में किशोरों के यौन उत्पीड़न का आरोपी - फोटो : अमर उजाला
सेवानिवृत्त लेखपाल डीलडौल से भले ही ढीला हो लेकिन ‘खाकी’ और ‘खादी’ दोनों पर ही उसका रुतबा दिखता था। इसी से उसके सारे गुनाह सिर्फ चर्चाओं तक ही सिमट कर रह गए और कभी भी किसी मामले में कोई लिखापढ़ी नहीं हुई। इलाकाई लोगों का कहना है कि यदि पुलिस और राजनैतिक संरक्षण न मिला होता तो कई मासूम रामबिहारी का शिकार बनने से बच सकते थे।
Sexual harassment case of children, Jalaun news
किशोरों के यौन उत्पीड़न का आरोपी - फोटो : अमर उजाला
रामबिहारी का अपने मकान से जुए और सट्टे का व्यापार चलाना किसी के लिए कोई नईं बात नहीं। भगत सिंह मोहल्ले के हर एक छोटे बड़े व्यक्ति को इसकी जानकारी थी। करीब सात आठ माह पूर्व राम बिहारी से घर के भीतर जुआ खेलने के दौरान विवाद हुआ था।
 
Sexual harassment case of children, Jalaun news
पुलिस गिरफ्त में किशोरों के यौन उत्पीड़न का आरोपी - फोटो : अमर उजाला
तब रामबिहारी मोहल्ले के ही एक युवक पर लूट का आरोप लगाते हुए कोतवाली पहुंचा था। उसने जुए के दौरान रुपयों की छीनाझपटी का हार्ड डिस्क से लिया गया वीडियो भी पुलिस को दिखाया था। कोतवाली पुलिस जुआखाना चलाने पर कार्रवाई करने के बजाय तमाशबीन बनकर रामबिहारी की कहानी सुनती रही।
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Sexual harassment case of children, Jalaun news
पुलिस गिरफ्त में किशोरों के यौन उत्पीड़न का आरोपी - फोटो : अमर उजाला
तब नगर भाजपा के एक प्रभावशाली नेता ने पहुंचकर मामला रफा-दफा करा दिया। बताते हैं कि इस विवाद का वीडियो एक जनप्रतिनिधि व जिला संगठन के पदाधिकारी तक भी पहुंचा था लेकिन किसी ने रामबिहारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं कराई। इससे पार्टी की किरकिरी भी हुई थी।
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पुलिस गिरफ्त में किशोरों के यौन उत्पीड़न का आरोपी - फोटो : अमर उजाला
इसी तरह 2017 में सेवानिवृत्त होने से कुछ समय पहले ही रामबिहारी पर नदीगांव की एक महिला ने छेड़खानी का आरोप लगाकर कोतवाली में तहरीर भी दी थी, जिसमें पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाए दोनों पक्षों में समझौता कराकर प्रार्थना पत्र को ही फाड़कर फिकवा दिया था। इलाकाई लोगों का कहना है कि यदि उसी वक्त रामबिहारी पर शिकंजा कस जाता तो यौन उत्पीड़न के मामले भी सामने आ सकते थे और कई मासूम भी उसकी दरिंदगी से बच सकते थे।
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