कन्नौज के बिधूना-सौरिख फोरलेन रोड पर सोमवार को सुबह 9:15 बजे कन्नौज डिग्री कॉलेज के सामने विपरीत दिशा में खड़ी स्कूली मैजिक वैन में डंपर ने टक्कर मार दी। हादसे में 13 छात्र और चालक घायल हो गए। घायलों को आसपास के लोगों और कांवड़ियों ने अस्पताल भिजवाया। गंभीर रूप से घायल 10 छात्रों और मैजिक चालक रामू सिंह (35) को राजकीय मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। डीएम ने एआरटीओ को हादसे की जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
सौरिख के सरदापुर स्थित एमएसए (मदरसा सलीम अख्तर) एजुकेशन सेंटर की मैजिक वैन सुबह छात्रों को लेकर स्कूल जा रही थी। मैजिक में 13 छात्र सवार थे। छिबरामऊ-सौरिख फोरलेन मार्ग पर कन्नौज डिग्री कॉलेज के सामने विपरीत दिशा में खड़ी मैजिक वैन में सामने से आए मौरंग लदे डंपर ने टक्कर मार दी।
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हादसे में क्षतिग्रस्त पिकअप
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हादसे के बाद वैन पलट गई और धुआं निकलने लगा। चालक डंपर को छोड़कर फरार हो गया। आसपास मौजूद लोगों और कांवड़ियों ने वैन से छात्रों को बाहर निकाला। एंबुलेंस से घायल छात्रों को अस्पताल भिजवाया। हादसे की जानकारी मिलते ही डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री और एसपी विनोद कुमार घायलों का हाल जानने के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचे। डीएम ने छात्रों से घटना की जानकारी ली।
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ई-रिक्शा में जाते स्कूली बच्चे
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
छह किलोमीटर से बचने के लिए विपरीत दिशा में ले जाता था मैजिक
कन्नौज के छिबरामऊ-सौरिख फोरलेन मार्ग पर गांव खरौली पड़ता है। गांव से दो किलोमीटर पहले भगवंतपुर में और दो किलोमीटर बाद जरारा में कट बना हुआ है। खरौली से छात्रों को लेने के बाद चालक को दो किलोमीटर पीछे जाकर भगवंतपुर कट से मैजिक को मोड़ कर सौरिख की ओर जाना चाहिए था।
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ऑटो में जाते स्कूली बच्चे
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इस चक्कर से बचने के लिए चालक विपरीत दिशा में दो किलोमीटर तक मैजिक चलाता था और जरारा कट से सौरिख के सरदापुर स्कूल जाता था। अगर मैजिक विपरीत दिशा में न चल रही होती तो शायद हादसा ही नहीं होता।
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अस्पताल में भर्ती घायल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शिक्षकों के लिए पंजीकृत थी मैजिक, जा रहे थे बच्चे
एमएसए एजूकेशन सेंटर सरदापुर सौरिख के संचालक ने मैजिक का एआरटीओ कार्यालय में पंजीकरण तो करा रखा था पर पंजीयन के समय शिक्षकों को लाने और छोड़ने का शपथ पत्र दे रखा था। शिक्षकों के लिए पंजीकृत मैजिक में स्कूली छात्रों को ले जाते थे पंजीकरण करने के बाद जिम्मेदारों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।