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जाड़ा तो चला गया लेकिन 'सरकार! के स्वेटर कई सवाल छोड़ गए'
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 24 Apr 2018 08:47 AM IST
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डेमाे पिक
स्वेटर खरीदने के लिए चार सदस्यी समिति का गठन, समिति के माध्यम से ही कोटेशन और टेंडर किया जाना था। लेकिन जो हुआ वह हैरान करने वाला है। अधिकारियों ने शासनादेश में बताए गए नियमों के विपरीत अपनी नजदीक लोगों के माध्यम से कुछ फर्म से घटिया किस्म के स्वेटर खरीद कर स्कूलों में जबरन शिक्षकों को देकर बंटवा दिए। अब स्वेटर वितरण का यह मामला कई सवाल खड़े कर रहा है। मामला फर्रुखाबाद जिले का है...आगे पढ़ें क्या है पूरा मामला...
डेमाे पिक
परिषदीय स्कूलों में नौनिहालों को स्वेटर बांटने में शासनादेश की अनदेखी की गई। बिना टेंडर के फर्मों से स्वेटरों की सीधे खरीद की गई। स्कूलों में घटिया स्वेटर वितरण की शिकायत भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से की गई है। इसमें स्वेटर वितरण में गोलमाल करने का शिक्षा विभाग के अफसरों पर आरोप लगाया है। जिसकी जांच कराकर कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
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भाजपा के कायमगंज मंडल अध्यक्ष शिवराज सिंह ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को भेजी शिकायत में कहा कि 3 जनवरी 2018 को शासन के आदेश पर प्रत्येक परिषदीय विद्यालयों में गठित प्रबंध समिति के माध्यम से स्वेटर क्रय के लिए चार सदस्यों की समिति बनाई गई थी।
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इस समिति के माध्यम से स्कूलाें में कोटेशन व टेंडर के माध्यम से स्वेटर खरीदकर छात्रों को नाप के अनुसार गुणवत्ता पूर्ण बांटे जाने थे। लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने शासनादेश में बताए गए नियमों के विपरीत अपनी नजदीक लोगों के माध्यम से कुछ फर्म से घटिया किस्म के स्वेटर खरीद कर स्कूलों में जबरन शिक्षकों को देकर बंटवा दिए।
जो स्वेटर दिए गए , उनकी कीमत मात्र 100 रुपये से अधिक नहीं है। जबकि सरकार की ओर से 200 रुपये प्रति स्वेटर की कीमत के अनुसार बजट आया था। स्वेटर खरीद और बंटवाने में धन का बंदर बाट किया गया है। इस खेल की शिकायत जिला प्रशासन से लेकर शासन तक भेजी गई, लेकिन ने स्वेटर वितरण में हुए गोलमाल को गंभीरता से लेकर जांच नहीं कराई। मंडल अध्यक्ष ने इस प्रकरण की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और गोलमाल किए गए रुपयों की रिकवरी दोषियों के वेतन से किए जाने की मांग की है।
जो स्वेटर दिए गए , उनकी कीमत मात्र 100 रुपये से अधिक नहीं है। जबकि सरकार की ओर से 200 रुपये प्रति स्वेटर की कीमत के अनुसार बजट आया था। स्वेटर खरीद और बंटवाने में धन का बंदर बाट किया गया है। इस खेल की शिकायत जिला प्रशासन से लेकर शासन तक भेजी गई, लेकिन ने स्वेटर वितरण में हुए गोलमाल को गंभीरता से लेकर जांच नहीं कराई। मंडल अध्यक्ष ने इस प्रकरण की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और गोलमाल किए गए रुपयों की रिकवरी दोषियों के वेतन से किए जाने की मांग की है।