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इस साल आपकी थाली से गायब नहीं होगी दाल, आजादी के बाद पहली बार बंपर पैदावार
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 02 Mar 2017 05:20 PM IST
सार
आजादी के बाद कभी 220 लाख टन प्रोडक्शन नहीं हुआ
- अब बफर स्टॉक बनेगा, नियंत्रित रहेगी कीमत
- मांग और आपूर्ति बराबर, विदेशों से दाल मंगाने का झंझट खत्म होगा
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विस्तार
इस साल आम आदमी की थाली से दाल गायब नहीं होगी। पिछले वर्ष दालों की खुदरा कीमतों में अनाप-शनाप उछाल ने आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया था। लेकिन इस बार दाल की बंपर पैदावार हुई है।
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आजादी के बाद से पहली बार देश में दलहन की बंपर पैदावार
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अरहर, चना, मटर, मूंग और मसूर की दाल अब सस्ती ही रहेगी। आजादी के बाद से पहली बार देश में दलहन की बंपर पैदावार 220 लाख टन हुई है। इस बार पैदावार में 40 लाख टन की बढ़ोतरी रिकॉर्ड की गई है। इससे कृषि विज्ञानी उत्साहित हैं। उनका कहना है कि अब दाल का बफर स्टॉक बनाया जाएगा। इसके जरिये दाल की महंगाई नियंत्रित की जाएगी। जरूरत पड़ने पर बफर स्टॉक से दाल निकालकर बाजार तक ले जाया जाएगा।
भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान (आईआईपीआर) ने दलहन प्रोडक्शन 2016-17 के आंकड़े जारी कर दिए हैं। इसके मुताबिक दलहनी फसलों की पैदावार 220 लाख टन हो गई है। यह मांग और आपूर्ति के बराबर है। प्रोडक्शन बढ़ने की वजह से विदेशों से दाल मंगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान (आईआईपीआर) ने दलहन प्रोडक्शन 2016-17 के आंकड़े जारी कर दिए हैं। इसके मुताबिक दलहनी फसलों की पैदावार 220 लाख टन हो गई है। यह मांग और आपूर्ति के बराबर है। प्रोडक्शन बढ़ने की वजह से विदेशों से दाल मंगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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विदेशों से हर साल मंगानी पड़ती थी 55 लाख टन दाल
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आईआईपीआर के निदेशक डॉ. एनपी सिंह ने बताया कि 2015-16 में दलहन की पैदावार 180 लाख टन थी। यह मांग और आपूर्ति से कम थी। इस कारण विदेशों से 55 लाख टन दाल मंगानी पड़ी थी। प्रति किलोग्राम दाल की कीमत 200 रुपये के आसपास पहुंच गई थी। इसको देखते हुए ही कृषि विज्ञानियों ने फील्ड वर्क किया।
दलों का दाम में भी आएगी गिरावट
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किसानों से संपर्क साधकर दलहनी फसलों की बुआई का क्षेत्रफल (खेत) 290 लाख हेक्टेयर कराया। बुआई हुई और मौसम ने भी साथ दिया। अब बंपर पैदावार के आंकड़े निकलकर सामने आए हैं। निदेशक ने कहा कि प्रति किलोग्राम अरहर दाल की कीमत 120-125 रुपये है। यही रेट बना रहे, इसकी कोशिश में आईआईपीआर लगा है। अरहर की पैदावार में करीब 15 लाख टन की बढ़ोतरी हुई है। 2015-16 में अरहर की 30 लाख टन दाल पैदा हुई थी, जो अब 45 लाख टन हो गई है।
260 लाख टन का होगा बफर स्टॉक
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आईआईपीआर को अगले तीन साल में 260 लाख टन दाल का बफर स्टॉक बनाना है। इसकी शुरूआत इसी सत्र से हो गई है। दो लाख टन दाल का बफर स्टॉक बनाया जा रहा है। सत्र 2017-18, 2018-19 और 2019-20 तक इस स्टॉक को 258 लाख टन और बढ़ाना है।
प्रति हेक्टेयर पैदावार बढ़ेगी
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दलहनी फसलों की प्रति हेक्टेयर पैदावार बढ़ाकर 10 कुंतल करने की तैयारी है। इसके लिए उन्नत प्रजाति के बीज विकसित किए जा रहे हैं। उन्नत तकनीक से खेती-किसानी की सलाह भी दी जा रही है। अभी प्रति हेक्टेयर खेत में दलहन की पैदावार सात कुंतल है।
पहले 190 लाख टन का प्रोडक्शन
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दलहन की सर्वाधिक 190 लाख टन पैदावार 2013-14 में हुई थी। इसके बाद प्रोडक्शन 170-180 लाख टन के बीच रह गया। इस बार क्षेत्रफल बढ़ा और बुआई भी अच्छी हुई। इसी का नतीजा रहा कि रिकार्ड पैदावार हो गई।