सात दिन तक प्यारा दरबार सजाया, रात-दिन सिर-माथा नवाया, दिल में बैठाया और अगले बरस तू जल्दी आ का जयकारा लगाकर विदा किया। पर, अब ये हाल। गणपति की प्रतिमाओं का विसर्जन के बाद ये बुरा हाल देखना कितना दुखदायी है।
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गणेश विसर्जन के बाद दुर्दशा
- फोटो : अमर उजाला
गणेश पूजा पंडाल सजाने वाले हजारों लोग अब क्या कहेंगे। क्या करोड़ों लोगों की धर्म-आस्था से जुड़े इस विसर्जन को सुखदायी नहीं बनाया जा सकता। क्या किया जाए जो ऐसा न हो।
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गणेश विसर्जन के बाद दुर्दशा
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ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। हर साल भक्त श्रृद्धा भाव से गणपति को घर लाते हैं अथवा पंडाल में विराजमान करते हैं। विधि-विधान से पूजन करते हैं। गणपति का मनमोहक भोग लगाते हैं।
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गणेश विसर्जन के बाद दुर्दशा
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फिर महोत्सव खत्म होते ही पंडाल से गणपति के विसर्जन की जोरदार तैयारियां करते हैं। विसर्जन के बाद घाटों पर जो दृश्य देखने को मिलता है वह किसी अपराध से कम नहीं है। कूड़े के ढेर में पड़ी गणपति की मूर्ति मन को विचलित कर जाती है।
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गणेश विसर्जन के बाद दुर्दशा
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इस अपराध से बचने के लिए जरूरी है कि प्रतिमाएं छोटी रखी जाएं, जल में जल्द घुलनशील तत्वों से बनाई जाएं या भूविसर्जन किया जाए या कुछ और। कुछ भी हो पर उपाय सोचिए वरना कह दीजिए गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू मत आ।