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Bdy Spcl: जब मायावती फूट-फूटकर रोईं, बोलीं- मेरे भाई की विधवा को देना वोट, किस्से ये भी
Tue, 15 Jan 2019 12:34 PM IST
शिखा पांडेय
प्रशांत कुमार द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर
प्रशांत कुमार द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 15 Jan 2019 12:34 PM IST
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मायावती
मायावती...राजनीतिक गलियारों में एक ऐसा नाम जिनकी पहचान ही है उनका तेज तर्रार स्वभाव और निर्णय लेने की क्षमता। निर्णय पर अडिग रहना मायावती की दूसरी पहचान है। तमाम राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद मायावती ने अपने निर्णय और स्वभाव से कभी समझौता किया हो ऐसा कम ही देखने को मिलता है। उनके जन्मदिन के मौके पर आपको रूबरू कराते हैं मायावती के जीवन से जुड़े कुछ ऐसे किस्सों के बारे में जब मायावती फूट-फूटकर रोने लगीं थीं...जी हां कई ऐसे पल भी आए जब मायावती टूट गईं थीं।
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मायावती
15 जनवरी, बसपा सुप्रीमों मायावती का जन्मदिन है। मायावती को उनके तेज तर्रार स्वभाव के लिए जाना जाता रहा है पर रिश्तों के प्रति उनकी संजीदगी बताती है कि कठोर दिखने वाली मायावती अंदर से कितनी ममतामयी हैं। जानें मायावती के जीवन के ये किस्से...
मायावती
1977 में कांशीराम के संपर्क में आने के बाद मायावती का राजनीतिक जीवन शुरू हुआ। 14 अप्रैल 1984 को बसपा के गठन के बाद मायावती ने स्कूल की नौकरी से इस्तीफा दे दिया।
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मायावती
1984 में कैराना, 1985 में बिजनौर और 1987 में वह उत्तर प्रदेश के हरिद्वार से बसपा की लोकसभा की उम्मीदवार बनीं। लेकिन तीनों बार उनको हार का सामना करना पड़ा।
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मायावती
1989 के आमचुनाव में मायावती बिजनौर से सांसद चुनी गईं। 1991 में हुए मध्यावधि चुनाव में मायावती को अपनी सीट गंवानी पड़ी। इसी दौरान कांशीराम ने मायावती को पार्टी का महासचिव बना दिया।