डीजे के जमाने में लाइव म्यूजिक का दौर लौटने लगा है। रेस्त्रां और मॉल में लाइव म्यूजिक शो में उमड़ने वाले शहरी इसे काफी पसंद करने लगे हैं। कहीं आर्केस्ट्रा तो कहीं गिटार और पियानों की सुरीले धुनें शहरियों का मनोरंजन कर रहीं हैं। सिंगरों और म्यूजीशियनों को शहर में ही काम मिलने लगा है। इसके लिए उन्हें अच्छा-खासा वेतन भी दिया जा रहा है। इस वक्त शहर में जेड स्क्वायर मॉल, होटल लैंडमार्क, तड़का और बेस्टवेर्स्टन रेस्त्रां में लाइव शो परफॉर्म किए जा रहे हैं।
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लाइव म्यूजिक का जमाना वापस आया
कानपुर के जेड स्क्वायर मॉल में पियानो बजाने वाले सरबजीत कहते हैं, कि अपनी कला को शहर में प्रदर्शित करने का अच्छा मौका मिला है। ट्रिनटी ऑफ लंदन से म्यूजिक सीखने वाले सरबजीत कहते हैं, कि पहले म्यूजिक सीखने के बाद लोग जॉब के लिए बाहर जाते थे, अब धीरे-धीरे शहर में भी विकल्प मिल रहे हैं। आने वाले समय में यह क्रेज बढ़ेगा। रिस्पांस काफी अच्छा है|
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लाइव म्यूजिक का जमाना वापस आया
रेव मोती मॉल के तड़का रेस्त्रां में गाना गाने वाले रोहित और शानू कहते हैं कि लोगों का रिस्पांस काफी अच्छा मिलता है। केवल तीन घंटे शाम को परफार्म करते हैं। उसका पारिश्रमिक भी मिलता है। साथ ही शौक भी पूरा हो जाता है। तड़का के मैनेजर कृष्णा कहते हैं, कि परिवार के साथ खाना खाने आने वाला परिवार सुकून चाहते हैं। म्यूजिक सिस्टम बजाना सस्ता है, लेकिन लोग शोर नहीं पसंद करते हैं। लाइव म्यूजिक लोगों का मनोरंजन तो करता है साथ ही कलाकारों के हुनर को मौका मिलता है। उधर, होटल लैंडमार्क के रेस्त्रा 1857 में लाइव सिंगिंग हफ्ते में सात दिन होती है। यहां भी यह लाइव शो शहरियों को खासा पसंद आ रहा है।
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लाइव म्यूजिक का जमाना वापस आया
डीजे के शोर में गुम हो गए थे
वर्ष 2000 से पहले शहर की पार्टियों और शादी-ब्याह में आर्केस्ट्रा का अच्छा-खासा चलन था। डीजे आने के बाद ये लाइव शो धीरे-धीरे कम हो गए थे। हालिया वर्षों में तो ये शो गिनी-चुनी जगह ही होते थे। ऐसे में सिंगरों और संगीतकारों को शहर में काम मिलना बंद हो गया था।