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कौमार्य अवस्था में जीवन मर्यादित हुआ तो जवानी और बुढ़ापे में नहीं होगीं दिक्कतें, डाल लें ये आदतें
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 08 Feb 2018 11:05 PM IST
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बांदाः जीवन मर्यादित करना है तो रामचरित मानस का सहारा जरूरी है। कौमार्य अवस्था में यदि जीवन मर्यादित हो गया तो जवानी व बुढ़ापा बेहतर बीतेगा।
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कथावाचक अभिषेक शुक्ला ने सूर्यवंशी राजाओं का वर्णन करते हुए कहा कि यदि हमें जीवन मर्यादित करना है तो किशोर उम्र से ही रामचरित मानस पढ़ने की आदत डालनी होगी।
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गिरवां स्थित भूतेश्वर महादेव मंदिर में चल रही संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन गुरुवार को कथा व्यास देवी निहारिका ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा में मनुष्य को भवसागर से पार लगाने की शक्ति समाहित है, लेकिन यह तभी संभव होता है जब यह श्रद्धा व भक्तिभाव से सुनी जाए। भागवत पुराण का महत्व बताया।
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उन्होंने कहा कि यदि भागवत कथा भाव व श्रद्धा से नहीं सुना तो कोई औचित्य नहीं है।
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मनोरंजन की दृष्टि से भागवत कथा सुनना पाप है। उन्होने कहा कि परमात्मा हमारे आसपास अलग-अलग स्वरूपों में विराजमान है। उनका दर्शन करना है तो भाव, मन व कर्म को पवित्र करें। हमारी पवित्रता ही परमात्मा मिलन का मार्ग खोलती है।