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किडनी कांड: पुलिस ने गंवाया अस्पताल कोऑर्डिनेटर को दबोचने का मौका

Wed, 20 Feb 2019 03:39 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Wed, 20 Feb 2019 03:39 PM IST
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Kidney scandal case
प्रतीकात्मक फोटो
कानपुर में पुलिस ने किडनी कांड का खुलासा तो किया, लेकिन दिल्ली के नामचीन अस्पतालों के कोऑर्डिनेटरों को रंगेहाथ दबोचने का मौका गंवा दिया। पुलिस ने सिर्फ गिरोह के संचालकों और डोनरों तक पहुंचकर ही स्टिंग खत्म कर दिया था। इस लापरवाही के कारण पुलिस को अब कोऑर्डिनेटर समेत अन्य बड़ी मछलियों को पकड़कर उनके खिलाफ सुबूत जुटाने में काफी मशक्कत करनी पड़ सकती है।
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मामले का खुलासा एक महिला की शिकायत पर हुआ। शिकायत के बाद नौबस्ता थाने में तैनात दरोगा विशेष कुमार ने एक महिला सिपाही के साथ मिलकर स्टिंग प्लान किया था। इसके लिए राजेश से मिलकर पैसों की जरूरत बताई थी। राजेश ने उन्हें किडनी बेंचने की बात कही थी। विशेष ने नौ फरवरी को दिल्ली पहुंचकर पैथॉलॉजी में जांचें भी कराई थीं। बाद में वह लौट आया था।
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Kidney scandal case
प्रतीकात्मक फोटो
11 फरवरी को गिरोह का गौरव मिश्रा उनसे मिलने शहर आया था, इसी दौरान पुलिस ने उसे दबोच लिया था। अब सवाल उठ रहे हैं कि पुलिस स्टिंग जारी रखकर फर्जी दस्तावेज तैयार कर डीएनए सैंपल बदलवाने की प्रक्रिया तक क्यों नहीं पहुंची। अगर वह ऐसा करती तो फोर्टिस और पीएसआईआर अस्पताल के कोऑर्डिनेटर तक आसानी से पहुंच जाती। पुलिस के पास पुख्ता सुबूत भी होते और आरोपी रंगे हाथ दबोचे जाते।

Kidney scandal case
डेमो पिक
डॉ. केतन भी चढ़ सकता था हत्थे
विदेश में किडनी बेचने का रैकेट डॉ. केतन कौशिक ने खड़ा किया है। पुलिस को इसका केवल नाम ही पता है। यह दिल्ली में कहां रहता है, क्लीनिक कहां है और यह डॉक्टर असली है या फर्जी, इसकी पुख्ता जानकारी तक पुलिस को नहीं है। पुलिस ने अगर कार्रवाई आगे बढ़ाई होती तो वह भी हत्थे चढ़ सकता था।

इसलिए तो पीछे नहीं हटी पुलिस
मामले में पुलिस ने जिन तीन अस्पतालों के नाम का खुलासा किया है, वह नामचीन हैं। इसलिए यह भी सवाल उठ रहे हैं कि बड़े अस्पतालों का नाम आने से पुलिस पीछे हटी थी। बाद में आला अधिकारियों से बातचीत कर कार्रवाई की। शायद यही वजह रही कि गौरव को पड़ने के छह दिन बाद पुलिस ने किडनी कांड का खुलासा किया।
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