कानपुर से लेकर दिल्ली, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, लखनऊ समेत अन्य शहरों में डॉ. रोहित बन कोई और ही अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट का खेल कर रहा है। इसकी जानकारी पुलिस को अब तक हुई जांच में हुई है।
दरअसल पुलिस की टीमें एनसीआर क्षेत्र में पिछले दो दिनों से नर्सिंगहोम, सरकारी व निजी अस्पताल, क्लीनिक आदि में डॉक्टर की तलाश कर रही हैं। डॉ. रोहित नाम का कोई भी चिकित्सक नहीं मिला है। आईएमए और सर्जन एसोसिएशन के पदाधिकारियों का सहयोग लिया जा रहा है।
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कानपुर के हैलेट अस्पताल से किडनी ट्रांसप्लांट के मरीजों को लखनऊ के लोहिया इंस्टीट्यूट में किया रेफर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आहूजा हॉस्पिटल में अनधिकृत तरीके से हुए किडनी ट्रांसप्लांट में जेल भेजे गए डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा, डॉ. प्रीति आहूजा, राजेश कुमार, राम प्रकाश, शिवम अग्रवाल और नरेंद्र सिंह ने पुलिस पूछताछ में डॉ. रोहित का नाम बताया था।
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हैलट के सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल से किडनी के मरीज पारूल, आयुष को पीजीआई लखनऊ लेकर जाती एंबुलेंस
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पारुल तोमर और आयुष ने भी डॉ. रोहित नाम के डॉक्टर की जानकारी दी थी। डॉ. रोहित का नाम साउथ अफ्रीका की महिला अरेबिका के गुर्दा प्रत्यारोपण में भी आया था। पुलिस को उसके मेरठ और नोएडा के नर्सिंगहोम से जुड़े हुए होने की सूचना मिली थी जिस पर अलग अलग टीमें भेजी गईं।
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कानपुर के हैलेट अस्पताल से किडनी ट्रांसप्लांट के मरीजों को लखनऊ के लोहिया इंस्टीट्यूट में किया रेफर
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डीसीपी पश्चिम एमएम कासिम आबिदी के मुताबिक पिछले दो दिनों में टीम को इस नाम से किसी भी डॉक्टर की जानकारी नहीं मिली है। दोनों टेक्नीशियन के साथ आए यूरोलॉजिस्ट का पता चल गया है। उसकी तलाश की जा रही है।
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किडनी ट्रांसप्लांट मामले में गिरफ्तार ओटी टेक्नीशियन कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार
- फोटो : पुलिस
डॉ. रोहित के नाम पर संभव है कोई और ही किडनी ट्रांसप्लांट का खेल खेल रहा हो। उसने यह चाल पकड़े जाने से बचने के लिए की हो। डॉ. आहूजा ने बताया था कि सीसीटीवी कैमरों को बंद करने और ट्रांसप्लांट से पूर्व स्टाफ की छुट्टी करने की प्लानिंग डॉ. रोहित ने की थी।