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Kanpur Encounter: विकास के गुर्गों ने बीस लाख की सुपारी लेकर की थी कॉलेज प्रबंधक की हत्या, मौत के बाद खुलासा
Mon, 13 Jul 2020 02:15 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
प्रशांत द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर
प्रशांत द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 13 Jul 2020 02:15 AM IST
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विकास दुबे
- फोटो : अमर उजाला
दहशतगर्द विकास दुबे की मौत के बाद उसके जुल्मो सितम के मारे हुए लोगों में न्याय की उम्मीद जगी है। विकास के संरक्षण में उसके गुर्गों ने भी क्षेत्र में आतंक मचा रखा था। 2007 में चौबेपुर थाना के जिंदपुर गांव में विकास के गुर्गों ने दिनदहाड़े कॉलेज प्रबंधक की हत्या कर दी थी।
अमर दुबे की फाइल फोटो व विकास दुबे
- फोटो : अमर उजाला
विकास ने खेल कर खुद ही हत्यारे गोविंद दुबे का थाने में आत्मसमर्पण करा दिया। विकास की दहशत के आगे पुलिस ने परिजनों की तहरीर को भी दरकिनार कर सिर्फ एक को ही जेल भेज कर पल्ला झाड़ लिया। विकास की मौत के बाद प्रबंधक के परिजनों में एक बार फिर से न्याय की उम्मीद जगी है।
अमर दुबे (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
एनकाउंटर में मारे गए अमर दुबे के चाचा ने ली थी 20 लाख की सुपारी
कल्याणपुर में रहने वाले भरत पांडेय ने बताया कि उनके पिता स्व. राजेश पांडेय बीएसए ऑफिस में अकाउंटेंट थे। सेवानिवृत्त होने से पहले उन्होंने अपने गांव शिवली सखरेज से करीब एक किमी दूर चौबेपुर के जिंदपुर गांव में माता-पिता के नाम से करीब ढाई बीघे जमीन पर विनोदीदेवी कैलाशनाथ इंटर कॉलेज का निर्माण कराया। जिंदपुर में रहने वाले अखिलेश पांडेय को कॉलेज की देखरेख सौंप रखी थी।
कल्याणपुर में रहने वाले भरत पांडेय ने बताया कि उनके पिता स्व. राजेश पांडेय बीएसए ऑफिस में अकाउंटेंट थे। सेवानिवृत्त होने से पहले उन्होंने अपने गांव शिवली सखरेज से करीब एक किमी दूर चौबेपुर के जिंदपुर गांव में माता-पिता के नाम से करीब ढाई बीघे जमीन पर विनोदीदेवी कैलाशनाथ इंटर कॉलेज का निर्माण कराया। जिंदपुर में रहने वाले अखिलेश पांडेय को कॉलेज की देखरेख सौंप रखी थी।
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Kanpur encounter
- फोटो : अमर उजाला
कॉलेज में कब्जे की नीयत से अखिलेश ने दहशतगर्द विकास से संपर्क कर पिता के नाम सुपारी दे दी। 20 लाख में सौदा तय हुआ। विकास के खास रहे एनकांउटर में मारे गए अमर दुबे के चाचा व अतुल दुबे के बड़े भाई गोविंद दुबे ने साथियों के साथ मिलकर 9 जून 2007 को कॉलेज परिसर में गोली मार कर पिता की हत्या कर दी। मां मीना पांडेय ने विकास व उसके गुर्गों के खिलाफ पति की हत्या की तहरीर दी, लेकिन घटना के दूसरे दिन ही विकास ने खुद ही गोविंद का थाने में समर्पण करा दिया। 2008 में उसे उम्रकैद की सजा हुई, लेकिन हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर वह बाहर आ गया।
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kanpur encounter
- फोटो : amar ujala
गांव में घुसने पर दी थी जान से मारने की धमकी
भरत के अनुसार अखिलेश ने कॉलेज में कब्जा कर लिया। मां ने कई बार कॉलेज पर कब्जा लेने का प्रयास किया, जिसमें विकास और उसके गुर्गों ने गांव में घुसने पर पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी। इससे घबरा कर वो दोबारा कभी गांव नहीं गए। इस बीच अखिलेश ने कई बार समिति के पदाधिकारियों की सूची से उनका नाम हटवाने के लिए फर्जीवाड़ा भी किया, लेकिन उनके हस्ताक्षेप से ऐसा नहीं हो सका। इस दौरान उन पर 2013 में बिठूर रोड पर जाने से मारने का प्रायस हुआ, इसके पहले हत्या की धमकियां दी गईं, जिनमें उन्होंने बिठूर और चौबेपुर थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने सांठगांठ कर एफआर लगा दी।
भरत के अनुसार अखिलेश ने कॉलेज में कब्जा कर लिया। मां ने कई बार कॉलेज पर कब्जा लेने का प्रयास किया, जिसमें विकास और उसके गुर्गों ने गांव में घुसने पर पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी। इससे घबरा कर वो दोबारा कभी गांव नहीं गए। इस बीच अखिलेश ने कई बार समिति के पदाधिकारियों की सूची से उनका नाम हटवाने के लिए फर्जीवाड़ा भी किया, लेकिन उनके हस्ताक्षेप से ऐसा नहीं हो सका। इस दौरान उन पर 2013 में बिठूर रोड पर जाने से मारने का प्रायस हुआ, इसके पहले हत्या की धमकियां दी गईं, जिनमें उन्होंने बिठूर और चौबेपुर थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने सांठगांठ कर एफआर लगा दी।