कानपुर में नारामऊ ब्लैक स्पॉट पर सड़क हादसे में जान गंवाने वाली शिक्षिका आकांक्षा मिश्रा के एयरफोर्स में कार्यरत पति गौरव मिश्रा गुरुवार को अपने मासूम और परिजनों के साथ घटना स्थल पहुंचे। हाईवे पर खून के धब्बे देख वह फफक पड़े। उनके साथ मौजूद भाई सौरभ व बहनोई प्रद्युम्न राज शुक्ला ने ढांढस बंधाया।
गौरव कभी अपने मासूम बेटे की ओर देखते तो कभी खूनी कट की तरफ जिसकी वजह से उनकी पत्नी की जान गई। गौरव ने कहा कि अफसरों ने कट तब बंद कराया जब उनकी सारी खुशियां छिन गई। कहा कि खतरनाक कट की जानकारी जब अधिकारियों को थीं तो उन्होंने इसका विकल्प पहले क्यों नहीं निकाला। कट अगर पहले ही बंद हो जाता तो आज आकांक्षा उनके साथ होती।
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kanpur road accident
- फोटो : amar ujala
मम्मा-मम्मा पुकार रहा था मासूम
उन्होंने आगे बताया कि उनका बेटा हर वक्त अपनी मां को ढूंढता रहता है। कभी जोर-जोर से रोने लगता है, तो कभी उनकी गोद से चिपक सिर्फ मां को बुलाने की बात कहता है। सभी लोग उसे बहलाने की कोशिश करते हैं, लेकिन वह घंटों तक नहीं मानता। वहीं, गौरांग को गोद में लेकर खड़े चाचा सौरव ने बताया गौरांग न तो ठीक से दूध पी रहा है न ही खेल रहा है। बस हर वक्त मम्मा-मम्मा पुकार रहा है। यहां तक की दो रातों से ठीक से सोया भी नहीं। रूंधे गले से बोले, भगवान ने बहुत गलत किया।
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बेटे की देखभाल के लिए कानपुर में कराउंगा ट्रांसफर
गौरव ने बताया बीते साल 22 मार्च को उनकी पोस्टिंग कानपुर से दिल्ली हुई थी। पत्नी की मौत के बाद बच्चों की परवरिश के लिए वह फिर से कानपुर ट्रांसफर करवाने के अधिकारियों से गुहार लगाएंगे। वहीं, आकांक्षा के देवर सौरव ने परिवार के लिए वित्तीय सहायता की मांग की है।
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ड्राइवर कार तेज चलाता था, आकांक्षा मना करती थी
आकांक्षा के ससुर अशोक कुमार त्रिपाठी ने बताया कि आकांक्षा रोजाना बिठूर रोड की ओर से स्कूल आती-जाती थी, लेकिन उस दिन वह नारामऊ की ओर से क्यों आई, इसका कारण भी उसके साथ ही चला गया। ड्राइवर विशाल के तेज कार चलाने की कई बार शिकायतें सामने आई थीं। जब आकांक्षा उसे तेज चलाने से मना करती थी, तो वह कहता था कि वह उतनी ही तेज चलाता है जितनी कंट्रोल कर सके। उन्होंने मांग की कि छोटे बेटे सौरभ त्रिपाठी को आकांक्षा की जगह नौकरी दी जाए।
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अंजुला की बेटियों ने दो दिन से नहीं खाया खाना
बर्रा विश्व बैंक डी ब्लॉक निवासी अंजुला मिश्रा की मौत के बाद 24 घंटे से ज्यादा बीत चुके हैं, लेकिन उनकी बेटियां पर्णिका और सोनिका ने अब तक खाना नहीं खाया है। अंजुला के पति आनंद ने बताया कि बेटियों को अंजुला शाम को पहला निवाला खिलाती थी। अंजुला के घर में काम करने वाली माया ने बताया कि वह 9 साल से काम कर रही है लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ कि उन्होंने कभी भेदभाव किया हो। बुधवार सुबह भी रोज की तरह दीदी के घर आई, चाय बनाई और उनके साथ चाय पी। फिर वह स्कूल के लिए निकल गईं। जाते-जाते बोलीं- बेटियों के लिए कुछ अच्छा बना देना।