उत्तर प्रदेश में कानपुर के अशोकनगर में रहने वाले विनायक निगम कबाड़ को आकार देकर सुंदर-सुंदर कलाकृतियां तैयार करने में उस्ताद हैं। वह साइकिल की चेन, लोहे के तार, लकड़ी आदि की मदद से शहर के अलग-अलग संस्थानों के लिए पेड़, योग की मुद्राओं वाली आकृति बना चुके हैं। इटावा लॉयन सफारी के लिए शेर बनाकर भी दे चुके हैं।
इस समय वह कानपुर नगर निगम के लिए 12 फीट की मूर्ति तैयार कर रहे हैं। विनायक निगम ने बताया कि उन्हें बचपन से ही आर्ट बनाने का शौक था। 12वीं करने के बाद डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय से विजुअल आर्ट में स्नातक और परास्नातक किया।
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कबाड़ से बनी कलाकृति
- फोटो : अमर उजाला
12वीं तक मोतीझील स्थित ललित कला अकादमी में अपने हुनर को और बेहतर किया। इसके बाद मम्मी-पापा से पूंजी लेकर कंपनी बनाई। अब उनके उत्पाद अमेजन या अन्य ऑनलाइन प्लेटफार्म पर उपलब्ध हैं।
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उन्होंने बताया कि बेकार सामान का उपयोग करने पर उन्हें भारतीय कला रत्न 2022, अजंता-एलोरा अवॉर्ड 2022, बांबेया सोसाइटी की ओर से इसी साल पुरस्कार मिला है।
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विनायक निगम बताते हैं कि अखरोट, पशुओं की हड्डी, सीमेंट, गिट्टी, लोहे के तार, कागज की लुगदी, वाशर, सरिया, प्लास्टिक, फाइबर, गत्ता, लकड़ी, साइकिल की चेन, मिट्टी, चम्मच या किसी भी प्रकार के अपशिष्ट से वह मनचाही आकृति तैयार करते हैं। अब वह लखनऊ में 10 से 12 फरवरी को होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में भी अपने उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे।
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आठ साल बाद मिला आर्ट गैलरी में शामिल होने का मौका
विनायक निगम ने बताया कि मुंबई की जहांगीर आर्ट गैलरी में 6-12 मार्च को लगने वाली प्रदर्शनी में उन्हें जाने का मौका मिला है। उनका दावा है कि आठ साल पहले इसके लिए पंजीकरण कराया था। इसके अलावा 2029 के आयोजन में भी वह शामिल होंगे। इसके लिए भी उनका पंजीकरण हो गया है।