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IIT KANPUR की खास पेशकश दुनिया के हर कोने तक 11 भाषाओं में पहुंचेंगे ये ग्रंथ, ये हैं लिंक
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 15 Jan 2018 06:08 PM IST
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आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर प्रभाकर टीवी द्वारा तैयार किया गया धार्मिक ग्रंथों का डिजिटल संस्करण दुनिया भर में हिट हो गया है। फेसबुक, व्हाट्सएप जैसे तमाम सोशल नेटवर्क साइट्स पर आईआईटी की इस पहल की जमकर तारीफ हो रही है।
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लोग इन धार्मिक ग्रंथ की वेबसाइट का लिंक व्हाट्सएप और फेसबुक पर शेयर कर रहे हैं। प्रो. प्रभाकर के मुताबिक पहले वेबसाइट पर रोजाना तीन से पांच सौ लोग विजिट करते थे, अब वेबसाइट पर 25 हजार से ज्यादा हिट्स प्रतिदिन आने लगे हैं। प्रो. प्रभाकर बताते हैं कि 2001 में उन्हें एनडीए सरकार के दौरान 25 लाख रुपये इस प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए दिए गए थे। उसके बाद से वह और उनकी टीम इस पर काम कर रही थी। पूरी टीम ने मिलकर श्रीमद्भागवत गीता, रामायण, वेद, रामचरितमानस, ब्रहसूत्र, श्री राम मंगल दासजी, नारद भक्ति सूत्र और उपनिषद को डिजिटलाइज्ड कर दिया है। ये सभी ग्रंथ अब आईआईटी कानपुर की वेबसाइट पर टेक्सट, ऑडियो और वीडियो के रूप में उपलब्ध हैं।
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दुनिया भर के लोग पढ़ रहे
देश और दुनिया के किसी भी कोने में कोई भी अपने मोबाइल और कंप्यूटर पर इन ग्रंथों को पढ़ और सुन सकता है। वीडियो को डाउनलोड करने की सुविधा भी दी गई है। रोजाना दूसरे देशों में करीब एक हजार लोग इस वेबसाइट को देख रहे हैं।
देश और दुनिया के किसी भी कोने में कोई भी अपने मोबाइल और कंप्यूटर पर इन ग्रंथों को पढ़ और सुन सकता है। वीडियो को डाउनलोड करने की सुविधा भी दी गई है। रोजाना दूसरे देशों में करीब एक हजार लोग इस वेबसाइट को देख रहे हैं।
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11 भाषाओं में उपलब्ध है ग्रंथ
प्रो. प्रभाकर ने इन ग्रंथों को हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी, मलयालम, गुजराती सहित 11 भाषाओं में तैयार किया है। अलग-अलग भाषाओं में मैटेरियल तैयार करने में आईआईटीयंस को दो से तीन साल लग गए। डिप्टी डायरेक्टर प्रो. मणिंद्र अग्रवाल ने बताया कि यह देश और दुनिया के लिए एक खास तोहफा है। हमारे देश की खासियत हमारे वेद और पुराणों से ही है, जिस पर पूरा विज्ञान टिका है। इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।
प्रो. प्रभाकर ने इन ग्रंथों को हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी, मलयालम, गुजराती सहित 11 भाषाओं में तैयार किया है। अलग-अलग भाषाओं में मैटेरियल तैयार करने में आईआईटीयंस को दो से तीन साल लग गए। डिप्टी डायरेक्टर प्रो. मणिंद्र अग्रवाल ने बताया कि यह देश और दुनिया के लिए एक खास तोहफा है। हमारे देश की खासियत हमारे वेद और पुराणों से ही है, जिस पर पूरा विज्ञान टिका है। इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।
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सुंदरकांड भी एप पर
आईआईटीयंस ने सुंदरकांड के लिए अलग से मोबाइल एंड्रायड एप भी तैयार किया है। इसमें टेक्स्ट और ऑडियो दोनों ही फॉरमेट में सुंदरकांड उपलब्ध है। इसके अलावा बाल कांड, अयोध्या कांड, अरण्य कांड, किष्किंधा कांड, लंका कांड और उत्तर कांड भी मौजूद हैं। तुलसीदास की जीवनी भी बताई गई है।
आईआईटीयंस ने सुंदरकांड के लिए अलग से मोबाइल एंड्रायड एप भी तैयार किया है। इसमें टेक्स्ट और ऑडियो दोनों ही फॉरमेट में सुंदरकांड उपलब्ध है। इसके अलावा बाल कांड, अयोध्या कांड, अरण्य कांड, किष्किंधा कांड, लंका कांड और उत्तर कांड भी मौजूद हैं। तुलसीदास की जीवनी भी बताई गई है।