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ग्राउंड रिपोर्ट: स्ट्रेचर से कोराेना संक्रमितों के शव ले जाकर परिजन खुद दे रहे मुखाग्नि, न मास्क न पीपीई किट
Tue, 27 Apr 2021 01:16 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 27 Apr 2021 01:16 AM IST
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बिना मास्क और पीपीई किट के परिजन जला रहे हैं शव
- फोटो : amar ujala
उत्तर प्रदेश के कानपुर में कोरोना संक्रमित शवों से परिजनों, करीबियों को संक्रमण का खतरा है। सोमवार को भैरोघाट विद्युत शवदाह गृह में गेट के पास से परिजन ही टोकन लेकर नंबर आने पर अपनों के शव स्ट्रेचर से इलेक्ट्रानिक भट्ठियों के पीछे तक ले जाते दिखे।
शवदाह गृह के बाहर अंतिम संस्कार के लिए पड़े शव
- फोटो : amar ujala
वहां खुद ही लकड़ियां ले जाकर चिता बनाने और मुखाग्नि देने के लिए मजबूर रहे। कई लोगों ने बैग से शव भी बाहर निकालकर मुंह में गंगाजल डालने सहित विधिवत अंतिम संस्कार की कोशिश की। ज्यादातर लोग पीपीई किट पहनना तो दूर एन-95 मास्क तक नहीं लगाए थे। कुछ तो अंगोछे ही लपेटे थे।
शवों का लगा अंबार
- फोटो : amar ujala
वहां परिजनों को कोविड प्रोटोकॉल की जानकारी देने के लिए कोई नगर निगम कर्मी तक नहीं नजर आया। कोरोना काल में इस शवदाह गृह में रोज औसतन 70 शव पहुंच रहे हैं। शवदाह गृह की दोनों भट्ठियों में सुबह से रात तक 25-30 शवों का ही अंतिम संस्कार हो पाता है।
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देर रात तक हो रहे अंतिम संस्कार
- फोटो : amar ujala
शेष शव इसी परिसर में भट्ठियों के पीछे गंगा की तरफ लकड़ियों से जलाए जा रहे हैं। हालांकि लकड़ियों की व्यवस्था नगर निगम नि:शुल्क कर रहा है, लेकिन वहां न तो कोई लकड़ियां ले जाकर चिता लगाने के लिए कोई कर्मी रहता है और न ही अंतिम संस्कार कराने के लिए पंडा।
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एक दिन में जल रहे सैकड़ों शव
- फोटो : amar ujala
लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराने वाले समाजसेवी धनीराम बौद्ध ही कुछ लोगों का सहयोग कर देते हैं, पर शव इतने ज्यादा आ रहे हैं, जिनके चलते नगर निगम की व्यवस्था चरमरा गई है। स्थितियां ये हैं कि कई लोगों ने दो चिताओं की लकड़ियां थोड़ी-थोड़ी हटाकर अपने परिजनों के शवों का अंतिम संस्कार किया। यही नहीं टोकन लेने के बावजूद लोगों को छह से आठ घंटे का इंतजार करना पड़ रहा है।