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गंगा मेला पर रंगों से सराबोर हुए कनपुरिये, खूब उड़ा गुलाल, नहीं दिखा कोरोना का खौफ

Fri, 02 Apr 2021 03:29 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Fri, 02 Apr 2021 03:29 PM IST
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Ganga mela celebrated with great pomp in Kanpur amidst danger of corona
गंगा मेला पर रंगों से सराबोर हुए कनपुरिए - फोटो : amar ujala
देश में कोरोना संक्रमण फिर तेजी से फैल रहा है। हर दिन के साथ संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस सब के बीच कानपुर में पिछले 79 सालों से चली आ रही गंगा मेला मनाने की परंपरा का इस बार भी कनपुरियों ने बड़ी धूमधाम के साथ रंगों सराबोर होकर पर्व का मजा लिया।


 
Ganga mela celebrated with great pomp in Kanpur amidst danger of corona
रंगों से लाल नीली हुई सड़कें - फोटो : amar ujala
लोगों ने एक दूसरे को अबीर -गुलाल लगाकर गले मिलकर बधाइयां दी। युवाओं ने भी जमकर मेले का लुत्फ उठाया। नगर में जमकर रंग चला और युवाओं की टोलियां निकली। वहीं चौराहों पर फिल्मी धुनों पर लोगों ने खूब मस्ती की। गंगा मेला आजादी के दिवानों की याद में पिछले 77 सालों से कानपुर में मनाया जाता रहा है।

 
Ganga mela celebrated with great pomp in Kanpur amidst danger of corona
धूमधाम से मनाया गंगा मेला - फोटो : amar ujala
शुक्रवार को भी पूरे जोश के साथ कनपुरियों ने गंगा मेला के दिन खुद को रंगों में डुबो दिया। इस दौरान सभी रंगों में सराबोर नजर आए। हर ओर सिर्फ और सिर्फ लाल पीला हरा नीला काला रंग नजर आ रहा था। कई साल से गंगा मेला मनाने की चली आ रही इस परंपरा को हर बार निभाया जाता है। गंगा मेला के दिन यहां काफी रंग खेला जाता है। इस दिन निकलने वाला रंग ठेला लोगों के आकर्षण का केंद्र होता है। दो बड़े बड़े भैसों पर ठेला लगाकर उसपर ड्रमों को रखा जाता है। फिर उसमे रंग भरा जाता है। रंगे पुते लोग सरसैया घाट पहुंचते हैं और गंगा स्नान करते हैं। यह परंपरा निरंतर चलती आ रही है।

 
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Ganga mela celebrated with great pomp in Kanpur amidst danger of corona
नहीं दिखा कोरोना का खौफ - फोटो : amar ujala
जिस रास्ते से भी रंग का ठेला निकलता है उस रास्ते पर सिर्फ रंग ही रंग नजर आता है। ठेले पर रंग का जुलूस निकाला जाता है। यह जुलूस हटिया बाजार से शुरू होकर नयागंज, बिरहाना रोड, चौक सर्राफा सहित कानपुर के पुराने मोहल्ले से होते हुए रज्जन बाबू पार्क में खत्म होता है। इसके बाद सरसैया घाट पर शहर भर के लोग इकट्ठा होते हैं और एक-दूसरे को होली की बधाई देते हैं। इस दिन लोग कपड़ा फाड़ होली भी खेलते है। रंग खेलने वाले सभी लोग एक दूसरे के कपड़े फाड़ कर तारों पर टांग देते हैं। 

 
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Ganga mela celebrated with great pomp in Kanpur amidst danger of corona
खूब उड़ा अबीर गुलाल - फोटो : amar ujala
गंगा मेला की परंपरा अंग्रेजी हुकूमत की हार का प्रतीक भी है। वर्ष 1942 में इस मेले की नींव पड़ी थी। मेला संयोजक ज्ञानेंद्र विश्नोई बताते हैं कि कमेटी की स्थापना स्व. गुलाब चंद्र सेठ ने की थी। हटिया तब नगर के बड़े व्यापारियों और क्रांतिकारियों का गढ़ हुआ करता था। इन्हीं क्रांतिकारियों की प्रेरणा से कुछ युवकों ने 1942 में होली के दिन तिरंगा फहरा दिया। युवकों ने घोड़े पर सवार एक अंग्रेज के धमकाने पर उसकी पिटाई कर दी।
 
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