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प्रोफेसरों की मांगें अनसुनी, आईआईटी कानपुर में असहयोग आंदोलन शुरू

Wed, 21 Nov 2018 04:53 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Wed, 21 Nov 2018 04:53 PM IST
सार

- दलित उत्पीड़न में चार प्रोफेसरों पर हुई एफआईआर के खिलाफ दूसरे आईआईटी से भी मिला प्रोफेसरों और छात्रों का साथ
- निदेशक ने फैकल्टी फोरम के सभी प्रस्ताव को किया खारिज
- प्रोफेसरों की पत्नियों ने निदेशक कार्यालय घेराव, सुरक्षाकर्मियों ने धरने से हटाया
 

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dalit harassment case in kanpur iit
आईआईटी कानपुर

विस्तार

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) कानपुर के दलित असिस्टेंट प्रोफेसर के उत्पीड़न में चार प्रोफेसरों पर हुई एफआईआर का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। फैकल्टी फोरम की ओर से पारित किए गए आठ सूत्री प्रस्ताव को आईआईटी निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने मानने से साफ इंकार कर दिया।
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उन्होंने फैकल्टी फोरम के सभी बिंदुओं को एक झटके में खारिज कर दिया। कहा कि सभी मांगें मानने लायक नहीं हैं इसलिए वह इसमें किसी तरह से फैकल्टी फोरम का साथ नहीं दे सकते। इससे नाराज प्रोफेसरों ने संस्थान के सभी प्रशासनिक कार्यों में असहयोग करने का एलान कर दिया। दो दिनों में आगे की रणनीति तैयार करने के लिए फैकल्टी फोरम की आपात बैठक भी बुलाई गई है।
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वहीं, दूसरी ओर 150 से ज्यादा प्रोफेसरों की पत्नियों ने भी मामले में मंगलवार से धरना-प्रदर्शन शुरू करने की कोशिश की। बड़ी संख्या में महिलाएं निदेशक कार्यालय का घेराव करने पहुंची और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। हालांकि तुरंत इंस्टीट्यूट के सुरक्षाकर्मियों ने अनुमति न होने की बात कहते हुए सभी को वहां से हटा दिया।
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आईआईटी कानपुर
ये मांगे थी फैकल्टी फोरम की
- इंस्टीट्यूट प्रशासन की तरफ से चारों प्रोफेसरों का बचाव करना चाहिए और उन्हें विधिक सहायता भी देनी चाहिए।
- चारों प्रोफेसरों के परिजनों को भी हर तरह की मदद इंस्टीट्यूट प्रशासन को देना चाहिए।
- 24 घंटे के अंदर निदेशक को इस मामले की शिकायत से लेकर अभी तक के पूरे प्रकरण की जानकारी और जांच रिपोर्ट फैकल्टी फोरम में साझा करने को कहा था।
- रविवार की रात निदेशक आवास पर प्रोफेसरों और छात्रों की बातचीत का सिक्योरिटी ने वीडियो बनाया था। प्रोफेसरों ने कहा था कि अगर वीडियो निदेशक के निर्देश पर बनाए गए हैं तो उन्हें सभी से माफी मांगनी चाहिए और अगर यह सुरक्षा प्रभारी प्रो. दीपू फिलिप के निर्देश पर हुए थे तो उन्हें तुरंत उनके पद से हटाया जाना चाहिए।
- प्रस्ताव पास किया था कि इंस्टीट्यूट प्रशासन को इस मामले में यह स्पष्ट करना चाहिए कि चारों प्रोफेसरों को जांच में दलित उत्पीड़न का दोषी नहीं पाया गया है।
- फोरम में शामिल सभी सीनेटर्स इंस्टीट्यूट प्रशासन से सीनेट की आपात बैठक बुलाने के लिए अनुरोध करें।
- चारों प्रोफेसरों को उनके इस केस से छुटकारा दिलाने के लिए उन्हें हाईकोर्ट जाना पड़ेगा। इसलिए सभी फैकल्टी मिलकर उन्हें आर्थिक सहायता देंगे।
- फैकल्टी फोरम में शामिल सभी सदस्य उन सभी बैठकों का बहिष्कार करेंगे जिसमें उप निदेशक प्रो. मणिंद्र अग्रवाल और एयरोस्पेस विभाग के अध्यक्ष प्रो. एके घोष सदस्य या चेयरमैन हैं।

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आईआईटी कानपुर
दूसरे संस्थानों के प्रोफेसरों का मिला समर्थन
चारों प्रोफेसरों के समर्थन में आईआईटी कानपुर के अलावा कई अन्य आईआईटी संस्थानों के प्रोफेसर भी एकजुट होने शुरू हो गए हैं। बताया जाता है कि पांच दिनों के अंदर सभी आईआईटी संस्थानों के प्रोफेसर इस मामले में एक आपात बैठक बुलाएंगे। इसमें आगे की रणनीति तैयार करेंगे। कुछ प्रोफेसरों का कहना है कि चूंकि यह मामला राजनीति से जुड़ा है इसलिए इसपर चर्चा करने के लिए प्रोफेसरों का दल राष्ट्रपति से भी मिलने जाएगा। 

एसएसपी से मिले आईआईटी के प्रोफेसर
आईआईटी कानपुर के चार प्रोफेसरों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर प्रोफेसरों का एक दल मंगलवार को एसएसपी अनंत देव से मिला और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। कहा कि आरोपी प्रोफेसरों के बयान भी पुलिस अफसर (विवेचक) दर्ज करें। इस पर एसएसपी ने निष्पक्ष विवेचना का भरोसा प्रोफेसरों को दिया। आईआईटी के एयरोस्पेस विभाग के डॉ. सडरेला ने चार प्रोफेसरों के खिलाफ कल्याणपुर थाने मेें एससीएसटी, मानहानि समेत कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सीओ कल्याणपुर राजेश पांडेय मामले की विवेचना कर रहे हैं।
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