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बूचड़खाना बैन! मीट व लेदर इंडस्ट्री पर छाया गहरा संकट
अनुराग मिश्रा, अमर उजाला, उन्नाव
Updated Mon, 27 Mar 2017 09:19 AM IST
सार
-बूचड़खानों और पशुओं के ट्रांसपोर्टेशन में सख्ती से स्लाटर हाउसों में घटी मवेशियों की सप्लाई
-मीट इंडस्ट्री लड़खड़ाने से लेदर उद्योग में कच्चे चमड़े की किल्लत खड़ी हो सकती है
-उन्नाव में मीट एक्सपोर्ट का सालाना कारोबार छह हजार करोड़
-लेदर एक्सपोर्ट का दो हजार करोड़ तक कारोबार, एक सप्ताह में मीट उत्पादन में 50 फीसदी से अधिक की गिरावट
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विस्तार
प्रदेश सरकार की सख्ती के चलते लाइसेंस प्राप्त स्लाटर हाउसों पर भी बुरा असर पड़ा है। उदाहरण के बतौर उन्नाव जिले को ले लिजिए। यहां छह स्लाटर हाउस हैं। यहां से पैकेट बंद मीट विदेशों में एक्सपोर्ट होता है। ताबड़तोड़ कार्रवाइयों से मवेशी सप्लायर सहमे तो स्लाटर हाउसों में भी मवेशियों की किल्लत हो गई। दो दिन से जानवरों की सप्लाई लगभग बंद है। स्लाटरिंग न होने से लेदर इंडस्ट्रीज में भी कच्चे माल (जानवरों की खाल) की किल्लत खड़ी हो सकती है।
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करोड़ों का करोबार धराशायी
दहीचौकी औद्योगिक क्षेत्र में स्थित एओवी स्लाटर हाउस के बाहर पसरा सन्नाटा।
- फोटो : अमर उजाला
जिले में मीट एक्सपोर्ट का सालाना कारोबार छह हजार करोड़ और लेदर एक्सपोर्ट का सालाना लगभग दो हजार करोड़ रुपये का टर्नओवर है। अवैध बूचड़खानों को लेकर प्रदेश सरकार की सख्ती से छोटे पैमाने पर बिक्री करने वाली दुकानें बंद हैं। जगह-जगह पुलिस, एआरटीओ व पशु पालन विभाग की टीमों की चेकिंग से मवेशी सप्लायर ने काम लगभग बंद कर दिया है। इससे स्लाटर हाउसों में काम लगभग आधा रह गया है। स्लाटर हाउसों को जानवर सप्लाई करने वाले छोटे व्यापारियों ने किसानों से खरीद बंद कर दी तो मांस निर्यातक इकाईयों में जानवरों की सप्लाई भी कम हो गई।
जिले की बड़ी मांस निर्यातक इकाईयां इंडेग्रो फूड्स, एओवी फूड्स, रुस्तम फूड्स, मैस एग्रो, स्टैंडर्ड प्रोजन व जेएस इंटर नेशनल में कई दिन से स्लाटरिंग का काम काफी धीमा है। एक्सपोर्ट के लिए अमेरिका, आस्ट्रेलिया, वियतनाम सहित अन्य देशों में सप्लाई आर्डर भी समय से पूरे न होते देख उद्यमी भी परेशान हैं। स्लाटरिंग कम होने का असर लेदर इंडस्ट्री पर भी पड़ रहा है। टेनरियों में कच्चे माल की सप्लाई कम होने से लेदर प्रोडक्ट के एक्सपोर्ट इंडस्ट्रीज के साथ ही छोटे उद्योगों पर संकट गहरा सकता है।
जिले की बड़ी मांस निर्यातक इकाईयां इंडेग्रो फूड्स, एओवी फूड्स, रुस्तम फूड्स, मैस एग्रो, स्टैंडर्ड प्रोजन व जेएस इंटर नेशनल में कई दिन से स्लाटरिंग का काम काफी धीमा है। एक्सपोर्ट के लिए अमेरिका, आस्ट्रेलिया, वियतनाम सहित अन्य देशों में सप्लाई आर्डर भी समय से पूरे न होते देख उद्यमी भी परेशान हैं। स्लाटरिंग कम होने का असर लेदर इंडस्ट्री पर भी पड़ रहा है। टेनरियों में कच्चे माल की सप्लाई कम होने से लेदर प्रोडक्ट के एक्सपोर्ट इंडस्ट्रीज के साथ ही छोटे उद्योगों पर संकट गहरा सकता है।
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जल्द हालात न सुधरे तो बढ़ेंगी मुश्किलें
रुस्तम फैक्ट्री के गेट पर पशु व्यापारियों के लिए चस्पा नोटिस।
- फोटो : अमर उजाला
इंडेग्रो फूड्स के जीएम मो. जावेद ने बताया कि चेकिंग की सख्ती के चलते मवेशी सप्लायरों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। बताया कि यही हाल रहा तो यूरोप, अमेरिका, आस्ट्रेलिया के आर्डर समय से देने में संकट आ सकता है।
तो दूसरे देशों को मिलेगा लाभ
इंडेग्रो स्लाटर हाउस में काम न होने से लौटतीं महिला मजदूर।
- फोटो : अमर उजाला
यूपी लेदर एसोसिएशन के सदस्य व चर्म उत्पाद निर्यातक इकाई किंग्स इंटर नेशनल लिमिटेड के ताज आलम ने बताया कि स्लाटर हाउस लेदर इंडस्ट्री का मुख्य आधार हैं। स्लाटर हाउस प्रभावित हुए तो लेदर इंडस्ट्रीज भी चपेट में जरूर आएगी। बताया कि किसी विदेशी कंपनी की सप्लाई तय समय में नहीं पहुंचती तो यह व्यापारिक अनुबंध शर्तों का उल्लंघन माना जाता है। खरीद करने वाली कंपनी के पास अनुबंध खत्म करने का अधिकार होता है। बताया कि कई विदेशी कंपनियां पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश व अन्य देशों से माल खरीदते हैं। अगर पच्चीस फीसदी आर्डर भी किसी दूसरे देश के पास चला गया तो चर्म उद्योग चरमरा जाएगा।
फिटनेस सर्टिफिकेट के बिना नहीं होगी खरीद
मून शू फैक्ट्री में माल की कमी से बंद पड़ीं मशीनें।
- फोटो : अमर उजाला
प्रशासन की सख्ती के बाद स्लाटर हाउस संचालकों ने फैक्ट्री के बाहर नोटिस चस्पा कर दिया है। नोटिस में मवेशी व्यापारियों से स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि ट्रांसपोर्टेशन और जानवर के फिटनेस सर्टिफिकेट के बिना कोई माल (मवेशी) फैक्ट्री में नहीं खरीदा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक अब तक स्लाटर हाउसों में मानक से कई गुना अधिक स्लाटरिंग और दुधारू, बीमार और कम उम्र के मवेशी भी कटते थे, लेकिन सख्ती के बाद इस पर अंकुश लगा है।
नियमानुसार स्लाटरिंग पर कोई रोक नही- डीएम
डीएम अदिति सिंह ने बताया कि लाइसेंसी स्लाटर हाउसों में स्लाटरिंग (मवेशी काटने) पर कोई पाबंदी नहीं है। किसी स्लाटर हाउस में नियमों की अनदेखी जैसे स्वीकृति से अधिक मवेशी काटने, बीमार, दुधारू, घायल या कम उम्र के जानवर काटे जाते हैं तो कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि शासन के निर्देश पर स्लाटर हाउसों की चेकिंग कराकर मानक और अनियमितता की जांच कराई जा रही है।
नियमानुसार स्लाटरिंग पर कोई रोक नही- डीएम
डीएम अदिति सिंह ने बताया कि लाइसेंसी स्लाटर हाउसों में स्लाटरिंग (मवेशी काटने) पर कोई पाबंदी नहीं है। किसी स्लाटर हाउस में नियमों की अनदेखी जैसे स्वीकृति से अधिक मवेशी काटने, बीमार, दुधारू, घायल या कम उम्र के जानवर काटे जाते हैं तो कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि शासन के निर्देश पर स्लाटर हाउसों की चेकिंग कराकर मानक और अनियमितता की जांच कराई जा रही है।