किराये का मकान लेकर टाइम बम की टेस्टिंग करते थे आतंकी, चौंका देंगे ये खुलासे
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पता चला है सैफुल्लाह काफी टेक्निकल था। उसे कंप्यूटर, इंटरनेट आदि की अच्छी जानकारी थी। लखनऊ मुठभेड़ में मारे गए आतंकी सैफुल्लाह ने शहर के चार लोगों को अपने गैंग में शामिल किया था। ये लोग कौन हैं, नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) इनकी जानकारी जुटाने में लगी है। एनआईए और एसटीएफ की पूछताछ में खुलासा हुआ कि मनोहर नगर जाजमऊ निवासी सैफुल्लाह आईएसआईएस कानपुर-लखनऊ खुरासान गैंग का लीडर होने के नाते लोगों को भर्ती करने के लिए टेस्ट लेता था। घंटों बातचीत कर उनका माइंड वाश करता था।
टेस्ट के दौरान किसी को गंगा में छलांग लगवाता था, तो किसी को करंट लगाता था। आग में हाथ रखवाकर उनकी शारीरिक सहनशीलता चेक करता था। शहर से 12 लोगों का सैफुल्लाह ने टेस्ट लिया था। इसमें चार लोग पास हुए थे। राघवेंद्र ने बेचे थे 8000 कारतूस शस्त्र विक्रेता राघवेंद्र सिंह चौहान ने सैफुल्लाह और उसके साथियों को 8000 कारतूस बेचे थे। राघवेंद्र ने शहर की 40 आर्म्स दुकानों से ये कारतूस खरीदे थे। इतना ही नहीं राघवेंद्र फर्जी शस्त्र लाइसेंस भी बनाता था। यह बात एटीएस की छानबीन में सामने आई है।
इन शस्त्र दुकानदारों की सूची भी जांच एजेंसियों ने पुलिस को दी है। अफसरों ने मामले और दुकानों की जांच के लिए पुलिस की एक टीम भी गुपचुप गठित कर दी है। इधर, एटीएस राघवेंद्र की गायब रायफल का भी पता लगाने में जुटी है। इसके लिए राघवेंद्र को रिमांड पर लेने की तैयारी है।
जाजमऊ के कई दुकानदारों पर होगी कार्रवाई
जांच एजेंसियां आतंकियों को सामान मुहैया कराने वाले दुकानदार, संरक्षणदाता और शस्त्र विक्रेता पर भी कार्रवाई की तैयारी में हैं। सैफुल्लाह और उसके साथियों ने जिस दुकान से बम बनाने के लिए छर्रे, बारूद, घड़ी और अन्य सामान खरीदा था, उन दुकानदारों पर कार्रवाई हो सकती है। एनआईए ने दुकानदारों की सूचीबद्ध कर लिया है।