चित्रकूट में मंदाकिनी की हर साल बाढ़ में तबाही का मंजर झेलने वाले तरौंहा गांव में इस बार कहर एक परिवार पर ऐसा टूटा कि पूरा घर यानी छह मकान मलबा बन गए।
परिवार के सोनी, यशवंत, संतोष, मोटू, जागेश्वर, मूलचंद्र के अलग अलग मकान थे। बाढ़ ने सभी से उनकी छत छीनकर घर जमींदोज कर दिए, लेकिन इन परिवारों का हौसला नहीं डगमगाया। जहां महिलाओं ने उन्हीं गिरे घरों में जैसे-तैसे चूल्हा जलाकर परिवार के लिए खाना पकाया और खाया। वहीं, फिलहाल तिरपाल के नीचे खुद को सुरक्षित कर उसी मिट्टी में फिर से जिंदगी के सपने गढ़ रहे हैं।
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चित्रकूट में मंदाकिनी का कहर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यह मकान कुशवाहा परिवार के तीन भाइयों के अलावा उनके चाचा और दादा के थे। बाढ़ का पानी उतरा तो परिवार के सामने रहने की जगह तक नहीं बची। अब कोई गिरे मकान के मलबे के बीच तो कोई तिरपाल के नीचे बच्चों के साथ रहने को मजबूर हैं।
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परिवार के लोगों का कहना है कि मकान पहले से कच्चे और जर्जर थे। आवास योजना के तहत पक्का मकान मिलने की उम्मीद में आवेदन भी किया था, लेकिन लाभ नहीं मिला। अगर समय रहते आवास मिल जाता तो शायद बाढ़ में उन्हें अपना आशियाना नहीं गंवाना पड़ता।
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परिवार के सदस्यों ने बताया कि अचानक बाढ़ का पानी बढ़ने पर सभी लोग जान बचाकर घर से बाहर निकल गए। जब वापस लौटे तो मकान पूरी तरह गिर चुका था। कुछ ही देर में उनका वर्षों पुराना आशियाना और उसमें रखा सामान बाढ़ की भेंट चढ़ गया लेकिन उनकी उम्मीदें अभी टूटी नहीं हैं। परिवार के लोग मिलकर अपना घर फिर से बनाएंगे। मलबा हटाकर जल्द साफ-सफाई करेंगे और भगवान से प्रार्थना करेंगे कि अब मंदाकिनी नदी शांत रहे।
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स्वाति की मार्कशीट मलबे में दबी, बीकॉम छात्र के दस्तावेज गायब
बाढ़ ने बच्चों की पढ़ाई पर भी असर डाला है। छात्रा स्वाति की कक्षा एक से आठ तक की मार्कशीट मकान के मलबे में दब गई है। परिवार के लोग मलबे में दस्तावेज तलाश रहे हैं। वहीं बीकॉम की पढ़ाई कर रहे वासु के जरूरी शैक्षणिक दस्तावेज भी नहीं मिल रहे हैं। अचानक आई बाढ़ में परिवार को सामान समेटने तक का मौका नहीं मिला। अब जरूरी कागजात न मिलने से बच्चों की पढ़ाई को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।