कानपुर के रोशन नगर में आयकर अधिकारी विमलेश कुमार के शव को डेढ़ सालों तक घर पर रखकर देखभाल करने के मामले में शनिवार को परिजनों ने बताया था कि विमलेश को जब एक अस्पताल ने मृत घोषित कर दिया था, तो कई दिनों तक उसका इलाज कल्याणपुर और बर्रा के दो अस्पतालों में कराने के साथ-साथ छह माह तक क्षेत्र का झोलाछाप भी कर रहा था।
इस दौरान करीब 30 लाख रुपये वसूले गए थे। एडीसीपी पश्चिम लाखन सिंह यादव के नेतृत्व में गठित टीम इसकी तफ्तीश करेगी। वहीं, विमलेश के परिजनों ने इलाज कराने वाली बात, तो बताई लेकिन किन डॉक्टरों व झोलाछाप ने ऐसा किया उनके नाम नहीं बता सके। पुलिस अब अपने स्तर से जानकारी जुटाएगी।
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income tax officer dead body
- फोटो : अमर उजाला
कोई नहीं लगाया केमिकल
विमलेश की मां रामदुलारी और पिता राम औतार अभी कह रहे हैं कि उन्होंने विमलेश के शरीर पर किसी भी केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया। वह गंगाजल से ही शरीर को साफ करती थीं। अगर कहीं पर सड़न होती थी, तो उसको डिटॉल से धो देती थीं।
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मोहल्ले के लोग
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पीड़ित परिवार की हालत अभी ठीक नहीं है। वह बातचीत करने की स्थिति में नहीं है। जब बातचीत करने को तैयार हो जाएंगे, तो जांच को आगे बढ़ाया जाएगा। जिन अस्पतालों व झोलाछाप ने मृत होने के बावजूद इलाज के नाम पर पैसे वसूले हैं। उनके बारे में जानकारी जुटाकर कार्रवाई की जाएगी। -आनंद प्रकाश तिवारी, ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर
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मृतक की मां और भाई
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बता दें कि 18 अप्रैल 2021 को विमलेश को निमोनिया होने पर बिरहाना रोड स्थित मोती हॉस्पिटल में भर्ती कराया था, जहां उपचार के दौरान 22 अप्रैल को उनकी मृत्यु हो गई थी। अस्पताल प्रबंधन ने मृत्यु प्रमाणपत्र देते हुए विमलेश के शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया था।
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घर आने के बाद परिजन अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे तभी मां राम दुलारी ने विमलेश के दिल की धड़कन आने की बात कहकर अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। तभी से माता-पिता उसके शव को घर के एक कमरे में रखकर देखभाल कर रहे थे।