'मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान हाेती है। पंखों से कुछ नहीं हाेता हाैंसलाें से उड़ान हाेती है' इन लाइनाें काे अाैरैया जिले में रहने वाले एक किसान के बेटे ने सच कर दिखाया है। खेत की पगडंडियाें पर उसने दाैड़ना सीखा अाैर अब वाे मैराथन दाैड़ना चाहता है।
मेडल के लिए सर्दी में पसीना बहा रहा है मोहित
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 15 Jan 2018 09:53 PM IST
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