विश्व की कठिनतम प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक भारतीय प्रशासनिक सेवा-2019 का रिजल्ट मंगलवार को घोषित हो गया। इन होनहारों में टॉप टेन में शामिल प्रतिभा वर्मा ने इस स्वर्णिम सफलता के बेहद त्याग किया है, जो इनके जुझारू जज्बे को बयां करता है। IAS टॉपर प्रतिभा वर्मा का कहना है कि किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए सकारात्मक सोच होना सबसे जरूरी है।
अगर सोच सकारात्मक नहीं होगी तो लक्ष्य के पास पहुंचकर भी उसे हासिल नहीं कर सकते। आईएएस की परीक्षा के दौरान वह खुद ऐसी समस्याओं से गुजरीं, जब लगा कि इस बार भी प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना पूरा नहीं होगा। परीक्षा से कुछ दिनों पहले तक वह डेंगू की चपेट में आ गई थीं।
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प्रतिभा वर्मा
- फोटो : अमर उजाला
बुखार से शरीर तप रहा था। शारीरिक रुप से वह कमजोर हो गई थीं, लेकिन अपनी नकारात्मकता को खुद पर हावी नहीं होने दिया। डॉक्टर बहन के मार्गदर्शन में रहते हुए उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और ऑल इंडिया लेबल पर महिला वर्ग में टॉपर बनीं।
अमर उजाला से बातचीत में प्रतिभा ने बताया कि इंटरनेट के इस युग में सब कुछ हर किसी की पहुंच के दायरे में है। गांव में रहकर भी आईएएस की तैयारी की जा सकती है। तमाम स्टडी मैटेरियल ऑडियो व वीडियो फार्मेट में इंटरनेट पर मौजूद हैं। ऐसे में कोचिंग नहीं भी कर रहे हों तो इसके सहारे तैयारी की जा सकती है।
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प्रतिभा वर्मा
- फोटो : अमर उजाला
अपने चुने गए विषय की बेसिक नॉलेज के लिए किताबें पढ़ते रहें। नियमित समाचार पत्र पढ़ना भी बेहद जरूरी है। इससे करेंट अफेयर्स और ताजा मुद्दों पर विस्तृत जानकारी आसानी से मिल सकती है। अहम बिंदुओं को नोट करते रहें। इसके अलावा खुद को प्रेरित करते रहें। प्रभावशाली लोगों या टॉपर्स के इंटरव्यू देखें, पढ़ें। इससे भी काफी चीजें आसान हो जाती हैं।
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प्रतिभा वर्मा
- फोटो : अमर उजाला
अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार और दोस्तों को देते हुए कहा कि माता-पिता दोनों के शिक्षक होने के कारण उनका कॅरियर के लिए प्रोत्साहित करने में बराबर सहयोग मिला। उन्होंने कभी बेटा-बेटी में कोई भेद नहीं किया। पढ़ाई के लिए घर से दूर भेजा।
हर लड़की इतनी सक्षम है कि वह कोई भी बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल कर सकती हैं। बस उन्हें मौका देने की जरुरत है। सरकार बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए तमाम प्रयास कर रही है। अभिभावक भी बेटा-बेटी में अंतर को छोड़कर बेटियों को आगे बढ़ाने से न हिचकें।