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गोरखपुर में यहां दी गई थी राम प्रसाद बिस्मिल को फांसी, जेल की कोठरी भी मौजूद, फांसीघर भी

Fri, 20 Dec 2019 10:46 PM IST
विजय जैन डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर Published by: विजय जैन Updated Fri, 20 Dec 2019 10:46 PM IST
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Freedom fighter Ram Prasad Bismil was hanged here in Gorakhpur jail
इस जेल में दी गई थी राम प्रसाद बिस्मिल को फांसी - फोटो : अमर उजाला
काकोरी कांड के महानायक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल को 19 दिसंबर 1927 को गोरखपुर जेल की कोठरी में फांसी के फंदे पर लटकाया गया था। वो फांसीघर आज भी मौजूद है। लकड़ी का फ्रेम और लीवर भी सुरक्षित है। बीते दिन उनके बलिदान दिवस पर जगह-जगह आयोजित धार्मिक आयोजनों में उन्हें याद किया गया। आइए, उनके बलिदान दिवस पर देखते हैं वो जेल, जहां उन्होंने अपना आखिरी वक्त गुजारा।
Freedom fighter Ram Prasad Bismil was hanged here in Gorakhpur jail
राम प्रसाद बिस्मिल को इसी जगह दी गई थी फांसी। - फोटो : अमर उजाला
काकोरी में लूट लिया था खजाना
शाहजहांपुर के रहने वाले मुरलीधर दूबे के बेटे पंडित राम प्रसाद बिस्मिल 9 अगस्त 1925 को चंद्रशेखर आजाद सहित अपने नौ साथियों के साथ डाउन सहारनपुर-लखनऊ पैसेंजर पर शाहजहांपुर में सवार हुए। काकोरी में चेन पुलिंग की और क्रांतिकारियों ने आठ हजार नौ सौ 42 रुपये को लूट लिया। ब्रिटिश सरकार ने इनके गुनाहों को साबित करने के लिए 13 लाख 84 हजार रुपये खर्च कर दिए।
Freedom fighter Ram Prasad Bismil was hanged here in Gorakhpur jail
राम प्रसाद बिस्मिल को इसी जगह दी गई थी फांसी। - फोटो : अमर उजाला
राजद्रोह के आरोप में सुनाई फांसी
इनमें से चार को ब्रिटिश सरकार के खिलाफ राजद्रोह के आरोप में फांसी की सजा सुनाई गई। पंडित राम प्रसाद बिस्मिल को गोरखपुर जेल, अशफाक उल्लाह खान को फैजाबाद, रोशन सिंह को नैनी सेंट्रल जेल और राजेंद्र नाथ लाहिड़ी को गोंडा जेल में एक दिन और एक ही समय पर फांसी देने का फैसला दिया गया था।

बाद में इसमें बदलाव किया गया और अशफाक उल्लाह के साथ ही राजेंद्र प्रसाद लाहिड़ी को दो दिन पहले 17 दिसंबर को ही फांसी दे दी गई।
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Freedom fighter Ram Prasad Bismil was hanged here in Gorakhpur jail
राम प्रसाद बिस्मिल अंतिम दिनों में इसी जगह पर बंदी रहे। - फोटो : अमर उजाला
कोठरी नंबर सात में रहे थे बिस्मिल
पं. राम प्रसाद बिस्मिल को जिला कारागार लखनऊ से 10 अगस्त 1927 को गोरखपुर जेल लाया गया था। उन्हें कोठरी संख्या सात में रखा गया था। उस समय इसे तन्हाई बैरक कहा जाता था।

 
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Freedom fighter Ram Prasad Bismil was hanged here in Gorakhpur jail
इस कोठरी को अब बिस्मिल कक्ष के नाम से संरक्षित किया गया है। - फोटो : अमर उजाला
बिस्मिल ने चार महीने 10 दिन तक इस कोठरी को साधना केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया। इस कोठरी को अब बिस्मिल कक्ष और शहीद पंडित राम प्रसाद बिस्मिल बैरक के नाम से संरक्षित किया गया है।
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