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Gorakhpur News: टीबी अस्पताल में समय से पहले बंद मिले कई चैंबर
Sun, 20 Sep 2026 02:44 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sun, 20 Sep 2026 02:44 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
एम्स (गोरखपुर)। नंदानगर स्थित टीबी अस्पताल में मरीजों को चिकित्सकीय सेवाएं मिलने में परेशानी का मामला सामने आया है। ओपीडी का समय दोपहर दो बजे तक निर्धारित होने के बावजूद शनिवार को करीब 1:30 बजे ही कई चिकित्सकों के चैंबर बंद मिले। इससे इलाज की उम्मीद में पहुंचे मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानी उठानी पड़ी।
सिंघड़िया, कुनराघाट, नंदानगर, रानीडीहा, झरनाटोला सहित कुसमी बाजार क्षेत्र के कई गांवों की बड़ी आबादी इस अस्पताल पर निर्भर है। अस्पताल की स्थापना मुख्य रूप से टीबी के इलाज और नियंत्रण के लिए हुई थी।
टीबी के मामलों में कमी आने के बाद यहां अन्य रोगों के मरीजों का भी उपचार किया जाता है। रोजाना बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंचते हैं।
शनिवार को दोपहर करीब 1:30 बजे अस्पताल के भूतल और प्रथम तल पर स्थित विभिन्न ओपीडी कक्षों में कई चिकित्सक मौजूद नहीं थे। स्त्री व प्रसूति रोग तथा हृदय रोग विभाग के चैंबर भी बंद मिले। मरीजों ने बताई परेशानी
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अस्पताल पहुंचे सिंघड़िया निवासी राहुल सिंह ने बताया कि वह अपनी मां की आंख का इलाज कराने आए थे लेकिन चिकित्सक के नहीं मिलने से परेशानी हुई।
नंदानगर निवासी विश्व मोहन दुबे ने आरोप लगाया कि कई बार अस्पताल में उपलब्ध दवाओं के बजाय बाहर की दवाएं लिखी जाती हैं। इससे मरीजों को मेडिकल स्टोर से दवा खरीदनी पड़ती है। ी
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एम्स (गोरखपुर)। नंदानगर स्थित टीबी अस्पताल में मरीजों को चिकित्सकीय सेवाएं मिलने में परेशानी का मामला सामने आया है। ओपीडी का समय दोपहर दो बजे तक निर्धारित होने के बावजूद शनिवार को करीब 1:30 बजे ही कई चिकित्सकों के चैंबर बंद मिले। इससे इलाज की उम्मीद में पहुंचे मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानी उठानी पड़ी।
सिंघड़िया, कुनराघाट, नंदानगर, रानीडीहा, झरनाटोला सहित कुसमी बाजार क्षेत्र के कई गांवों की बड़ी आबादी इस अस्पताल पर निर्भर है। अस्पताल की स्थापना मुख्य रूप से टीबी के इलाज और नियंत्रण के लिए हुई थी।
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टीबी के मामलों में कमी आने के बाद यहां अन्य रोगों के मरीजों का भी उपचार किया जाता है। रोजाना बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंचते हैं।
शनिवार को दोपहर करीब 1:30 बजे अस्पताल के भूतल और प्रथम तल पर स्थित विभिन्न ओपीडी कक्षों में कई चिकित्सक मौजूद नहीं थे। स्त्री व प्रसूति रोग तथा हृदय रोग विभाग के चैंबर भी बंद मिले। मरीजों ने बताई परेशानी
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अस्पताल पहुंचे सिंघड़िया निवासी राहुल सिंह ने बताया कि वह अपनी मां की आंख का इलाज कराने आए थे लेकिन चिकित्सक के नहीं मिलने से परेशानी हुई।
नंदानगर निवासी विश्व मोहन दुबे ने आरोप लगाया कि कई बार अस्पताल में उपलब्ध दवाओं के बजाय बाहर की दवाएं लिखी जाती हैं। इससे मरीजों को मेडिकल स्टोर से दवा खरीदनी पड़ती है। ी