प्रदेश सरकार की फजीहत कराने वाले देवरिया बालिका गृह कांड में एसआईटी ने सभी आरोपियों को बालिकाओं के साथ लैंगिक अपराध के आरोपों से मुक्त कर दिया। अब आरोपियों पर सिर्फ जेजे एक्ट, जालसाजी, मारपीट सहित अन्य धाराओं में ही सुनवाई होगी। शुक्रवार को एसआईटी ने मामले की चार्जशीट न्यायालय में पेश की। लैंगिक अपराध से संबंधित मामला न होने के कारण पाक्सो कोर्ट ने एसआईटी को फटकारा। कोर्ट ने मामले का संज्ञान लेने व रिमांड देने से इनकार कर दिया।
पाक्सो कोर्ट के इनकार के बाद देर शाम चार्जशीट सीजेएम कोर्ट में पेश की गई। सीजेएम ने भी एसआईटी से नाराजगी जताई। यहां काफी देर तक हुई बहस के बाद संयुक्त निदेशक अभियोजन की दलीलों पर सीजेएम तरन्नुम ने रिमांड बदलते हुए चार्जशीट का संज्ञान लिया। देर रात सभी आरोपी जेल भेज दिए गए।
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जांच के लिए जाती टीम
- फोटो : अमर उजाला
पांच अगस्त को स्टेशन रोड स्थित मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं सेवा संस्थान पर छापामारी करते हुए पुलिस ने 24 लड़कियों को मुक्त कराया। एक किशोरी के बयान के आधार पर पुलिस ने बालिका गृह में लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न व अन्य लैंगिक अपराध किए जाने का दावा करते हुए केस दर्ज किया था। संचालिका गिरिजा त्रिपाठी, पति मोहन त्रिपाठी, अधीक्षिका कंचनलता त्रिपाठी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
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जांच के लिए जाती टीम
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इसके बाद शासन ने एडीजी क्राइम के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया था। तत्कालीन डीएम सुजीत कुमार और बाद में एसपी रोहन पी.कनय को भी हटा दिया गया। जांच के दौरान एसआईटी ने चार अन्य चंद्रहास यादव, संजीव त्रिपाठी, हयात अफरोज व योगेंद्र दुबे को भी आरोपी मानते हुए गिरफ्तार कर लिया था। मामले की सुनवाई अब तक पाक्सो कोर्ट में ही चल रही थी।
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ताला तोड़ते हुए टीम के सदस्य
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वहीं से रिमांड भी बन रही थी। विवेचना के 90 दिन की अवधि पूरी होने पर एसआईटी के विवेचक बृजेश यादव शुक्रवार को पाक्सो कोर्ट में चार्जशीट दायर करने पहुंचे। आरोपियों को भी कोर्ट में पेश किया गया। चार्जशीट में लैंगिक अपराध की धाराएं न होने पर पाक्सो कोर्ट के जज पीके शर्मा ने रिमांड देने व चार्जशीट का संज्ञान लेने से इनकार कर दिया।