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UP: न्याय की आस में छोड़ गया दुनिया... क्या बदलेगा पुलिसिया अंदाज? गुलफाम को इसलिए चुनना पड़ा मौत का रास्ता

Mon, 13 Jan 2025 03:47 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, बदायूं
अमर उजाला नेटवर्क, बदायूं Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 13 Jan 2025 03:47 PM IST
सार

Gulfaam Case: बदायूं में एक जनवरी को गुलफाम ने एसएसपी कार्यालय में खुद को आग लगा ली थी। उसने पुलिस और अपनी पत्नी समेत ससुरालवालों पर परेशान करने का आरोप लगाया था। कोतवाली पुलिस ने उसकी एक न सुनी, सीओ जेल भेजने की धमकी देने लगे तो गुलफाम ने मौत का रास्ता चुन लिया।

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UP News Gulfaam Tragic Death Highlights Police Injustice A Man Struggle for Justice Ends in Despair
गुलफाम का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
UP Crime News: बदायूं का गुलफाम बानगी है उस सिस्टम की जहां एक आम आदमी को रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए अपनी जान दांव पर लगानी पड़ती है।  गुलफाम ने भी यही किया। कोतवाली पुलिस ने एक न सुनी, सीओ डोडे में जेल भेजने की धमकी देने लगे तो गुलफाम ने मौत का रास्ता चुन लिया। एसएसपी ऑफिस में जाकर खुद को आग लगा ली। तब तंत्र में सुगबुगाहट हुई और रिपोर्ट दर्ज हुई। मगर, अफसोस जिस न्याय की आस में गुलफाम भटक रहा था अब वह इस दुनिया में नहीं रहा। ई-रिक्शा चलाने वाले गुलफाम की मौत के बाद अब जिम्मेदारों को तलाशना जरूरी है। 
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एसएसपी कार्यालय बदायूं - फोटो : अमर उजाला
एसएसपी कार्यालय में आग लगाने के बाद उसे जिला अस्पताल लाया गया। हालत गंभीर होने पर उसे बरेली भेजा जा रहा था। सिस्टम को भले ही उसका दर्द न दिखा हो, लेकिन जिस्म पर उधड़ी हुई खाल उसकी पीड़ा बया कर रही थी। बता रही थी कि गुलफाम की आग दिखावटी नहीं है। गुलफाम उन लोगों पर कार्रवाई चाहता था जिन्होंने उसे पीटा। 

 
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गुलफाम आत्मदाह प्रकरण
उसके रुपये व ई-रिक्शा लूट लिया। कोतवाली गया तो इंस्पेक्टर राकेश सिंह ने एक न सुनी। सीओ संजीव कुमार के पास गया तो कार्रवाई के बजाय सीओ उसे दो किलो डोडे में जेल भेजने की धमकी देने लगे, जबकि पुलिस चाहती तो मारपीट की एनसीआर दर्ज कर सकती थी। हद तो यह थी कि कोतवाली पुलिस व सीओ ने उसके प्रार्थना पत्र पर जांच तक नहीं कराई।
 
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गुलफाम के पिता फिरोज अहमद से बात करते पूर्व विधायक आबिद रजा - फोटो : संवाद
आबिद बोले- न्याय दिलाने के लिए लड़ेंगे  
पुलिस की वजह से एक बार फिर विपक्ष को मुद्दा मिल गया। सूर्यकुंड की घटना का विवाद हाल ही में जैसे-तैसे निपटा है। मामला केंद्र सरकार तक पहुंच गया था। इसे ठंडा हुए अभी कुछ ही दिन हुए थे कि गुलफाम की मौत ने सपा नेताओं को मुद्दा दे दिया। गुलफाम के मामले में सपा ने एक डेलीगेट्स बनाया है। सपा सांसद एक्स पर लिखकर पहले ही सरकार को घेरने की कोशिश कर चुके हैं। 

 
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गुलफाम के जनाजे में पहुंचे पूर्व विधायक आबिद रजा - फोटो : अमर उजाला
हाल ही में पूर्व मंत्री आबिद रजा व अन्य सपा नेता गुलफाम से मिलने अस्पताल गए थे। रविवार शाम को गुलफाम का शव मीरा सराय में उसके घर आने के बाद आबिद रजा वहां पहुंचे। उन्होंने गुलफाम के माता-पिता से कहा कि वह उनकी हर संभव मदद करेंगे। मरने के बाद भी गुलफाम को न्याय दिलाया जाएगा। वह अधिवक्ताओं से संपर्क करके इंसाफ के लिए लड़ेंगे। उन्होंने कहा मरने से पहले गुलफाम ने जो बयान दिया था, उसी आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए। 
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