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Flood in UP: नदियों के निशाने पर गांव... 1500 किसानों की 900 एकड़ फसल बर्बाद, भुखमरी के साये में बड़ी आबादी
Mon, 22 Jul 2024 02:07 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखीमपुर
अमर उजाला नेटवर्क, लखीमपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 22 Jul 2024 02:07 PM IST
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कटान से नदी में समाए कई घर
- फोटो : अमर उजाला
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शारदा नदी में आए उफान की वजह से रविवार को मजरा दंबलटांडा से लेकर रैनागंज तक बना परियोजना तटबंध कट गया। इससे नदी किनारे की करीब 1500 किसानों की 900 एकड़ कृषि भूमि डूब गई। इसमें गन्ना, धान समेत अन्य फसलें थीं। शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने से लगातार फसलें खराब हो रही हैं, इससे किसानों के सामने भुखमरी का संकट खड़ा हो गया है। दंबलटांडा में 2017 में आठ करोड़ रुपये की लागत से शारदा नदी पर तटबंध बनवाया गया था, जो लगातार बाढ़ सहते-सहते कट गया है। ग्रामीणों ने तटबंध की मरम्मत कराने की मांग की है।
कटान से शारदा नदी में समा रही जमीन
- फोटो : अमर उजाला
ग्रामीणों ने अधिकारियों से बर्बाद हुई फसलों का सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने की मांग की है। ग्राम प्रधान रमेश्वरापुर हर्षदीप सिंह ने बताया कि अगर रेवतीपुरवा व दंबलटांडा दोनों परियोजनाओं की मरम्मत हो जाती है तो किसानों की फसलों को बाढ़ के पानी से बर्बाद होने से बचाया जा सकता है। बांध कट जाने से 900 एकड़ जमीन जलमग्न हो गई है। दंबल टांडा, रैनागंज, रामनगर, रेवतीपुरवा, बझेडा, दुबहा, नरायनपुरवा आदि गांवों में पानी घुस रहा है।
कुरतैहा के निकट घाघरा नदी कर रही कटान
- फोटो : अमर उजाला
फिर नदी के निशाने पर आए गांव
घाघरा नदी ने दो दशकों में जबरदस्त कटान कर सैकड़ों किसानों की हजारों हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि निगली है। माथुरपुर, कुरतैहा और मोटेबाबा का वजूद खत्म कर दिया था। तीनों गांवों के कटान पीड़ित ग्रामीण नदी से दूर सुरक्षित स्थानों पर जैसे-तैसे अपना आशियाना बनाकर गुजर बसर कर रहे थे, लेकिन घाघरा नदी को शायद वह मंजूर नहीं है। तीनों गांव पुन: घाघरा के निशाने पर आ गए हैं।
घाघरा नदी ने दो दशकों में जबरदस्त कटान कर सैकड़ों किसानों की हजारों हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि निगली है। माथुरपुर, कुरतैहा और मोटेबाबा का वजूद खत्म कर दिया था। तीनों गांवों के कटान पीड़ित ग्रामीण नदी से दूर सुरक्षित स्थानों पर जैसे-तैसे अपना आशियाना बनाकर गुजर बसर कर रहे थे, लेकिन घाघरा नदी को शायद वह मंजूर नहीं है। तीनों गांव पुन: घाघरा के निशाने पर आ गए हैं।
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पहले बाढ़, अब कटान से दहशत
- फोटो : अमर उजाला
साढ़े चार करोड़ की परियोजना को निगल रही घाघरा नदी
खेती-बाड़ी नदी में समाने के बाद ग्रामीणों के आशियाने उजड़ने का खतरा बढ़ गया है। घाघरा नदी करीब साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से तैयार परियोजना निगल कर तेजी के साथ आबादी की ओर बढ़ रही है। घाघरा का जबरदस्त कटान देख ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ गई हैं।
कुरतैहा और माथुरपुर से घाघरा नदी महज दो सौ मीटर की दूरी पर है, जिसकी आबादी करीब 2000 हजार के करीब है। यहां पर बांध घाघरा नदी में समा गया। इससे घाघरा आबादी की ओर बढ़ रही है। कई जगह बांध परियोजना पहली बारिश में ही धंस गई। जहां पैचअप कार्य हो रहा है।
खेती-बाड़ी नदी में समाने के बाद ग्रामीणों के आशियाने उजड़ने का खतरा बढ़ गया है। घाघरा नदी करीब साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से तैयार परियोजना निगल कर तेजी के साथ आबादी की ओर बढ़ रही है। घाघरा का जबरदस्त कटान देख ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ गई हैं।
कुरतैहा और माथुरपुर से घाघरा नदी महज दो सौ मीटर की दूरी पर है, जिसकी आबादी करीब 2000 हजार के करीब है। यहां पर बांध घाघरा नदी में समा गया। इससे घाघरा आबादी की ओर बढ़ रही है। कई जगह बांध परियोजना पहली बारिश में ही धंस गई। जहां पैचअप कार्य हो रहा है।
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कटान से नदी में गिरा पेड़
- फोटो : अमर उजाला
बाढ़ खंड विभाग के विगत वर्षों में कुर्तैहा और माथुरपुर गांवों को बचाने के लिए 498.52 लाख रुपये की लागत से 780 मीटर लम्बाई में बांध बनाया था। ऊपर मिट्टी डालने का कार्य हुआ था। जिसमें से करीब 200 मीटर घाघरा नदी निगल चुकी है।
घाघरा के जबरदस्त कटान को देखकर मुहाने पर गांव लालापुर, मोटेबाबा, रामनगर बगहा, तालियाघाट, गुलरिया और देवीपुरवा आदि गांव खड़े हैं। तीन दिन से हुई कटान में राम समुझ, राजेंद्र, जियालाल, इब्राहिम, इस्माईल के खेतों में फसलें नदी निगल चुकी है।
घाघरा के जबरदस्त कटान को देखकर मुहाने पर गांव लालापुर, मोटेबाबा, रामनगर बगहा, तालियाघाट, गुलरिया और देवीपुरवा आदि गांव खड़े हैं। तीन दिन से हुई कटान में राम समुझ, राजेंद्र, जियालाल, इब्राहिम, इस्माईल के खेतों में फसलें नदी निगल चुकी है।