राजू पाल हत्याकांड के मुख्य गवाह उमेश पाल की हत्या करने वाले शूटर विजय उर्फ उस्मान को बरेली जिला जेल में बंद माफिया अतीक के भाई अशरफ से मिलवाने के मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने जांच शुरू दी। गुरुवार दोपहर बिथरी स्थित जिला जेल (सेंट्रल जेल टू) पहुंची एसआईटी ने गेट से लेकर अंदर तक के करीब छह सीसीटीवी कैमरों का डाटा कब्जे में ले लिया। टीम ने अशरफ से मुलाकात वाले स्थान को देखा और वहां का नक्शा बनाया। जेल स्टाफ से पूछताछ भी की। बैरक के आसपास का जायजा लिया। मंगलवार को पुलिस ने विजय की अशरफ से मुलाकात कराने वाले सिपाही शिवहरि अवस्थी समेत जेल में सब्जी मुहैया कराने वाले दयाराम उर्फ नन्हे को गिरफ्तार कर लिया था।
Umesh Pal Murder Case: सीसीटीवी से खुलेगा राज, किसने-किसने की अशरफ से मुलाकात, SIT ने शुरू की जांच
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जेल से होती थीं व्हाट्सएप कॉल, बैरक में बनाए जाते थे प्लान
एजेंसियों की जांच में सामने आया है कि अशरफ और उसके गुर्गों की सप्ताह में कम से कम एक बड़ी मीटिंग जेल के अंदर जरूर होती थी। इसमें पुराने मुकदमों में लाभ लेने, गवाहों को धमकाकर खामोश रखने, विरोध की स्थिति में उनकी हत्या करने, पुलिस व जेल अधिकारियों को प्रलोभन देने, नहीं मानने पर उनकी और अभियोजन अधिकारियों की हत्या का प्लान तक बनाया जाता था। हालांकि बरेली जिला जेल में ही पूरी सेटिंग होने की वजह से बरेली में ऐसी नौबत नहीं आई। जेल में टेंपो चालक नन्हे के मोबाइल से भी अशरफ ने लोगों से बात की थी जिसकी पुष्टि हुई है। जेल से अधिकांश व्हाट्सएप कॉल ही हुई हैं पर कई बार शातिर इसका डाटा भी उड़ा देते थे। अब सर्विलांस सेल इसका रिकॉर्ड निकलवाने में जुटी है।
पुराने जेल अफसर भी जांच के घेरे में
करीब चार साल पहले अतीक अहमद को जिला जेल लाया गया था। इसके कुछ माह बाद नैनी जेल से अशरफ को यहां शिफ्ट कर दिया गया। इस लिहाज से उमेश पाल हत्याकांड की जांच में बरेली जिला जेल में रहे पुराने अफसर भी संदेह के घेरे में आ गए हैं। एसआईटी और एजेंसियों के स्तर पर यह जांच शुरू हो गई है। इसमें चार साल पहले तक यहां रहे अधिकारी व निचले स्तर के स्टाफ की भूमिका की भी जांच होनी है।