एक-दूजे का हाथ थामकर संग जीने-मरने की कसमें खाने वाले जोड़े अपने इन वचनों को 24 घंटे भी नहीं निभा सके। वैवाहिक जीवन में प्रवेश करते ही सुहाग बचा न सुहागन। अब बंद कमरे में हुई इन मौतों का जवाब कौन देगा, हर किसी के जेहन में यही सवाल है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत की वजह तो पता चलेगी, लेकिन घटना की वजह शायद रहस्य ही रह जाएगी।
सहादतगंज के मुरावन टोला निवासी भग्गन की मौत काफी पहले हो गई थी। उनके बेटों दीपक और प्रदीप के कंधों पर जिम्मेदारियां बचपन से आ गईं। दीपक ने ट्रक मैकेनिक का काम शुरू किया तो प्रदीप ने टाइल्स लगाना सीखा। मेहनत से दोनों ने गरीबी को मात दी और परिवार की माली हालत सुधारी।
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दूल्हा प्रदीप और दूल्हन शिवानी की फाइल फोटो
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एक-दूसरे के संपर्क में लगभग एक साल रहे दोनों
दोनों ने कड़ी मेहनत से शानदार आशियाना भी बनाया। इस बीच बीमार चल रही मां को प्रदीप के शादी की चिंता हुई। नात-रिश्तेदारों की मध्यस्थता से डीली सरैया के मजरे मोहलिया निवासी मंतूराम की पुत्री शिवानी का रिश्ता तय हुआ। दोनों एक-दूसरे के संपर्क में लगभग एक साल रहे।
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जमा लोगों की भीड़ व मौजूद एसपी सिटी
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शादी खुशियां मातम में बदली
आपस में बातचीत भी होती रही। माहौल अनुकूल होने पर सात मार्च को वह परिणय सूत्र में बंधे। अग्नि को साक्षी मानकर एक-दूजे के साथ फेरे लिए। कई कसमें खाईं, लेकिन 24 घंटे के भीतर ही दोनों की मौत हो गई। ऐसे में शादी खुशियां मातम में बदल गईं।
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बेहोश हुए परिवारीजन के लिए एंबुलेंस बुलवाते सीओ सिटी शैलेंद्र सिंह
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रस्मों-रिवाजों के गीत गाकर उत्सव मनाने आई महिलाओं और रिश्तेदारों की आंखों से आंसुओं की गंगा बह निकली। झालरों से सजा मकान व प्रीतिभोज में भोजन बनाने के लिए पड़े बर्तन भी लोगों को मानो काटने को दौड़ने लगे। मातमी शोर से मुरावन टोला दहल उठा।
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सहादतगंज में दूल्हा-दुल्हन की मौत के बाद बिलखते परिवारीजन
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प्रीतिभोज के लिए सब्जियां लाने गए थे परिजन
रविवार सुबह मृतक के बड़े भाई दीपक, पड़ोसियों व रिश्तेदारों के साथ सब्जी मंडी चले गए। उन्होंने बताया कि आधी सब्जियां खरीद चुके थे, इस बीच घर से फोन आया और जल्दी पहुंचने को कहा गया। वह लोग घर पहुंचे तो मामले की जानकारी हुई।